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सोमवार, 22 अप्रैल 2019

सच


इस दौर में वो सच कहता है,
मोमिन है या रिन्दना है !

सब सह कर हँसता रहता है,
पागल है या दीवाना है !

क्यूँ सिक्के जोड़ा करता है,
तुझको एक दिन मर जाना है !

किस शिद्दत से प्यासा होगा,
वो साग़र हो के तिश्ना है !

तरकीबें लाख लगाओ तुम,
जो होना है वो होता है !

एक बार तो मरने से पहले,
दिखला दे कितना ज़िन्दा है !

कुछ झूठे हमसे कहते हैं,
'अल्फ़ाज़तू कितना झूठा है !

तू ख़ुद को झूठा कहता है,
'अल्फ़ाज़तू कितना सच्चा है !

||| अल्फ़ाज़ |||
दौर = Time, Era, युगसमय
मोमिन = Believer, इश्वर में विश्वास रखने वाला
रिन्दना = Drunk, नशे में
शिद्दत = Vehemence, Severity
साग़र = Wine-Cup, Goblet, शराब का प्याला
तिश्ना = Thirsty, Insatiable, प्यासातृषित,
तरकीब = Method, Trick, युक्ति

शनिवार, 14 जुलाई 2018

मुक़द्दर !!!

हर आज़माइश में तू और बेहतर हो जा,
अपनी तक़दीर का तू ख़ुद मुक़द्दर हो जा !

वो भी इंसान था जिसने फ़तह की दुनिया,
तू भी इंसान है, ज़िद करके सिकंदर हो जा !

पायेगा उतना ही जितना तू चाहेगा ,
प्यास इतनी रख कि तू समंदर हो जा !

डर जायेगा तो हार यक़ीनन होगी,
जीत तेरी होगी जो तू निडर हो जा !

इतना भी न तू पी कि प्यास बुझ जाए,
इतना भी न छलक कि तू साग़र हो जा !

बे-सबब होने में सुकून रूहानी है,
किसीके लिए तू धूप में शजर हो जा !

ऐ दिल, तू बच्चों की तरह ज़िद न किया कर,
ऐ पाँव, तू भी चादर के बराबर हो जा !

आईने भी तो मोहताज हैं बीनाई के,
सच देखना है 'फ़राज़' तो बे-नज़र हो जा !

||| फ़राज़ ||| 

आज़माइश= Trial, Test, Examination
बेहतर= Better
तक़दीर= Divine Decree, Fate, Destiny
मुक़द्दर= Fate, Destiny
फ़तह= Conquer, Victory
यक़ीनन=  Definitely
साग़र= Wine-Cup, Goblet
बे-सबब= Without Cause Or Reason
सुकून= Peace, Tranquillity
रूहानी= Divine
शजर= Tree
मोहताज= Dependent
बीनाई= Eye-Sight, Vision

बे-नज़र= Without Sight, One Without Perceptiveness For The Intrinsic Worth Of Something