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शनिवार, 14 जुलाई 2018

मुक़द्दर !!!

हर आज़माइश में तू और बेहतर हो जा,
अपनी तक़दीर का तू ख़ुद मुक़द्दर हो जा !

वो भी इंसान था जिसने फ़तह की दुनिया,
तू भी इंसान है, ज़िद करके सिकंदर हो जा !

पायेगा उतना ही जितना तू चाहेगा ,
प्यास इतनी रख कि तू समंदर हो जा !

डर जायेगा तो हार यक़ीनन होगी,
जीत तेरी होगी जो तू निडर हो जा !

इतना भी न तू पी कि प्यास बुझ जाए,
इतना भी न छलक कि तू साग़र हो जा !

बे-सबब होने में सुकून रूहानी है,
किसीके लिए तू धूप में शजर हो जा !

ऐ दिल, तू बच्चों की तरह ज़िद न किया कर,
ऐ पाँव, तू भी चादर के बराबर हो जा !

आईने भी तो मोहताज हैं बीनाई के,
सच देखना है 'फ़राज़' तो बे-नज़र हो जा !

||| फ़राज़ ||| 

आज़माइश= Trial, Test, Examination
बेहतर= Better
तक़दीर= Divine Decree, Fate, Destiny
मुक़द्दर= Fate, Destiny
फ़तह= Conquer, Victory
यक़ीनन=  Definitely
साग़र= Wine-Cup, Goblet
बे-सबब= Without Cause Or Reason
सुकून= Peace, Tranquillity
रूहानी= Divine
शजर= Tree
मोहताज= Dependent
बीनाई= Eye-Sight, Vision

बे-नज़र= Without Sight, One Without Perceptiveness For The Intrinsic Worth Of Something

रविवार, 7 जनवरी 2018

बुत-शिकन !!!

वो परिंदे शाख़ों पे फ़िर नहीं लौटे,
दूर शहरों में जिनके घर हो गए !

अब किसी और पे तंज़ करते होंगे शहरवाले,
तो क्या हुआ जो हम शहर-बदर हो गए !

अपनी हस्ती पे गुमां वो करता क्यूँ है ?
क्या उसके सजदे में भी सर हो गए ?

तेरी मुट्ठी से भी फिसलेगी ये दुनिया एक दिन,
ख़ाली हाथ ही वो भी गए, जो सिकंदर हो गए !

नज़र तराशती रही ख़ुदा को ज़ाहिर में,
बुत-शिकन वो हुए, जो बेनज़र हो गए !

कोई शिकस्त रायग़ाँ न हमने जाने दी,
हम जब भी हारे तो और बेहतर हो गए !

सूबे में घुटी-घुटी सी ख़ामोशी क्यूँ है,
लगता है फ़सादी सूबे के सदर हो गए !

तो अब कौन सी शरिअ'त तामील की जाए,
'फ़राज़' अब तो बुर्क़े भी डिज़ाइनर हो गए !

|||फ़राज़|||

परिंदा= Bird
शाख़= Branch
तंज़= Sarcasm, Satire, Mocking, Sneer.
ताने= Blame, Reproach, Taunt.
शहर-बदर= Exile, Banishment.
हस्ती= Existence, Position.
गुमां= Doubt, Proud.
सजदा= Bowing to prayer so as to touch the ground with the forehead.
ज़ाहिर= Visible, outside, evident, open.
बुत-शिकन= Iconoclast, Idol-Breaker
बुत= Idols. A metaphor frequently used for beloved/women in Urdu poetry
बेनज़र= without eyes, 
शिकस्त= Defeat, Failure, Rout.
रायग़ाँ= Useless, Fruitless, In vain.
फ़सादी= Roitor, Dissenter
सूबा= Province, State.
सदर= President, Chief.
शरिअ'त= Islamic code of conduct.
तामील= Compliance, Submission, Execute.
बुर्क़ा= A kind of mantle or veil covering the whole body from head to toe.