हर आज़माइश में तू और बेहतर हो जा,
अपनी तक़दीर का तू ख़ुद मुक़द्दर हो जा !
वो
भी इंसान था जिसने फ़तह की दुनिया,
तू
भी इंसान है,
ज़िद
करके सिकंदर हो जा !
पायेगा उतना ही जितना तू चाहेगा ,
प्यास
इतनी रख कि तू समंदर हो जा !
डर
जायेगा तो हार यक़ीनन होगी,
जीत
तेरी होगी जो तू निडर हो जा !
इतना
भी न तू पी कि प्यास बुझ जाए,
इतना
भी न छलक कि तू साग़र हो जा !
बे-सबब होने में सुकून रूहानी है,
किसीके
लिए तू धूप में शजर हो जा !
ऐ
दिल,
तू
बच्चों की तरह ज़िद न किया कर,
ऐ
पाँव,
तू
भी चादर के बराबर हो जा !
आईने
भी तो मोहताज हैं बीनाई के,
सच
देखना है 'फ़राज़' तो बे-नज़र हो जा !
||| फ़राज़ |||
आज़माइश= Trial, Test, Examination
बेहतर= Better
तक़दीर= Divine Decree, Fate, Destiny
मुक़द्दर= Fate, Destiny
फ़तह= Conquer, Victory
बेहतर= Better
तक़दीर= Divine Decree, Fate, Destiny
मुक़द्दर= Fate, Destiny
फ़तह= Conquer, Victory
यक़ीनन= Definitely
साग़र= Wine-Cup, Goblet
बे-सबब=
Without Cause Or Reason
सुकून=
Peace, Tranquillity
रूहानी=
Divine
शजर= Tree
मोहताज=
Dependent
बीनाई=
Eye-Sight, Vision
बे-नज़र= Without Sight, One Without Perceptiveness For The
Intrinsic Worth Of Something