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बुधवार, 16 जनवरी 2019

हाल-ए-दिल

 तीर काटे है न ही तलवार काटे है,
जिस क़दर आपका इन्तिज़ार काटे है !

इश्क़ में आराम नहीं किसी भी सूरत,
कभी दर्द चुभता हैकभी क़रार काटे है !

वो साथ हों अगर तो फ़िर खिज़ाँ क्या है,
तन्हाई में तो मौसम-ए-बहार काटे है !

इतनी सी कमी है तेरे न होने से,
जैसे ख़ाली से घर में इतवार काटे है !

दिल को कैसे बचाएं हम उन निगाहों से,
उन शिकारी आँखों का हर वार काटे है !

दिल में कब सेंध लगीहमें ख़बर न हुई,
जैसे शातिर सा कोई चोर दीवार काटे है !

लोगों ने सिंगार देखाहमने सादगी देखी,
'अल्फ़ाज़को तो कजरे की धार काटे है !

||| अल्फ़ाज़ ||| 

तीर = Arrow
तलवार = Sword
क़दर = So Much; To Such A Degree.
इन्तिज़ार = Wait
सूरत = Condition, State
क़रार = Peace, Tranquility
खिज़ाँ = Autumn, Decay, Old Age
मौसम-ए-बहार = Spring Season
सेंध = A Hole Made In A Wall By Thieves Or Burglars, House-Breaking
शातिर = Clever, Sly, Cunning, 
सिंगार = Make Up
कजरा = Kohl

रविवार, 22 जुलाई 2018

मुंडेर !

चलो फ़िर से उसे छत पे बुलाया जाए,
चाँद फ़िर से मुंडेर पे लाया जाए !

सुना है उसकी मुस्कान बड़ी महँगी है,

चलो ख़ुद को दांव पे लगाया जाए !

चलो फ़िर से बहाने से उनको देखें,

चलो फ़िर से  पतंगों को उड़ाया जाए !

वो कश्मकश कि कौन पहले बात करे,

बात करने का कोई बहाना बनाया जाए !

शायद मेरी आहट पे चला आये दौड़ के,

चलो दीवार पे कपड़ों को सुखाया जाए !

चलो फिर से नज़र से कोई बात करें,

हाल-ए-दिल इशारों में जताया जाए !

चलो फ़िर से घर पे कोई महफ़िल हो,

सबके बहाने से उनको भी बुलाया जाए !

चलो फिर से ख़ुद को एक अज़ीयत दें,

चलो फ़िर से दिल उनसे लगाया जाए !

चलो चाँद में तकें फ़िर से उनके चेहरे को,

चलो फ़िर रात को जाग के बिताया जाए !

कोई बदनामी न होगी अगर नाम न आये,

बिना नाम लिए 'फ़राज़' उनपे कुछ सुनाया जाए !

||| फ़राज़ |||


कश्मकश= Struggle, Wrangle, Tussle,
हाल-ए-दिल= Condition Of The Heart
महफ़िल= Party, Gathering
अज़ीयत= Trouble, Suffering, Distress
बदनामी= Defame, Ignominy

सोमवार, 18 दिसंबर 2017

सरफ़राज़ियाँ !!!

बहुत ख़ूबसूरत लगी ज़िन्दगी मुझको,
जब दुनिया को बेसबब हो के देखा !
लगा न सका फ़िर कोई क़ीमत मेरी,
अनमोल हुआ जब सिफ़र हो के देखा !

एक सायबां से सीखा बेग़रज़ होना,
जब धूप में मैंने शजर हो के देखा !
देखना था उस बेशक्ल को 'फ़राज़',
सच को मैंने बेनज़र हो के देखा !

जिस्म के बग़ैर परछाईं कैसी दिखती है ,
अपने लोगों से मैंने अलग हो के देखा !
घर की दीवार भी बेजान नहीं होती,
घर को जाना जब बेघर हो के देखा !

तेरी ग़लतियों को ठहराना था जायज़,
आज मैंने भी ज़रा ग़लत हो के देखा !
अपने दामन के दाग़ भी नज़र आये,
ख़ुदको जब ख़ुद से अलग हो के देखा !

कोई आज़माइश हौसले से बड़ी नहीं होती,
हर मुश्किल को मैंने बेफ़िक्र हो के देखा !
आख़िर आ ही गईं सरफ़राज़ियाँ मेरे हिस्से
'फ़राज़' ने मर्तबा अपना ग़ज़ल हो के देखा !

|||फ़राज़|||

बेसबब = Without cause or reason. 
क़ीमत = Worth, Cost, Price, Value.
अनमोल = Rare.
सिफ़र = Zero, Naught.
सायबां = Canopy, Shade.
बेग़रज़ = Selfless.
शजर = Tree.
बेशक्ल = Faceless, The divine energy.
बेनज़र= Without sight.
बग़ैर = Without, Blind.
बेजान = Lifeless, Dead.
जायज़ = Lawfull, Legal, Right.
दामन = Hem.
दाग़ = Stigma, Spot.
आज़माइश = Test, Exam.
हौसला = Courage, Spirit, Capacity.
बेफ़िक्र= Careless.
सरफ़राज़ियाँ= Ennoblements, Blessings.
मर्तबा = Place, Class, Degree.