न तीर काटे है न ही तलवार काटे है ,
जिस क़दर आपका इन्तिज़ार काटे है !
इश्क़ में आराम नहीं किसी भी सूरत ,
कभी दर्द चुभता है, कभी क़रार काटे है !
वो साथ हों अगर तो फ़िर खिज़ाँ क्या है ,
तन्हाई में तो मौसम-ए-बहार काटे है !
इतनी सी कमी है तेरे न होने से ,
जैसे ख़ाली से घर में इतवार काटे है !
दिल को कैसे बचाएं हम उन निगाहों से ,
उन शिकारी आँखों का हर वार काटे है !
दिल में कब सेंध लगी, हमें ख़बर न हुई,
जैसे शातिर सा कोई चोर दीवार काटे है !
लोगों ने सिंगार देखा, हमने सादगी देखी,
||| अल्फ़ाज़ |||
तीर = Arrow
तलवार = Sword
क़दर = So
Much; To Such A Degree.
इन्तिज़ार = Wait
सूरत = Condition,
State
खिज़ाँ = Autumn,
Decay, Old Age
मौसम-ए-बहार = Spring Season
सेंध = A Hole
Made In A Wall By Thieves Or Burglars, House-Breaking
शातिर = Clever,
Sly, Cunning,
सिंगार = Make Up
कजरा = Kohl