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रविवार, 7 जनवरी 2018

बुत-शिकन !!!

वो परिंदे शाख़ों पे फ़िर नहीं लौटे,
दूर शहरों में जिनके घर हो गए !

अब किसी और पे तंज़ करते होंगे शहरवाले,
तो क्या हुआ जो हम शहर-बदर हो गए !

अपनी हस्ती पे गुमां वो करता क्यूँ है ?
क्या उसके सजदे में भी सर हो गए ?

तेरी मुट्ठी से भी फिसलेगी ये दुनिया एक दिन,
ख़ाली हाथ ही वो भी गए, जो सिकंदर हो गए !

नज़र तराशती रही ख़ुदा को ज़ाहिर में,
बुत-शिकन वो हुए, जो बेनज़र हो गए !

कोई शिकस्त रायग़ाँ न हमने जाने दी,
हम जब भी हारे तो और बेहतर हो गए !

सूबे में घुटी-घुटी सी ख़ामोशी क्यूँ है,
लगता है फ़सादी सूबे के सदर हो गए !

तो अब कौन सी शरिअ'त तामील की जाए,
'फ़राज़' अब तो बुर्क़े भी डिज़ाइनर हो गए !

|||फ़राज़|||

परिंदा= Bird
शाख़= Branch
तंज़= Sarcasm, Satire, Mocking, Sneer.
ताने= Blame, Reproach, Taunt.
शहर-बदर= Exile, Banishment.
हस्ती= Existence, Position.
गुमां= Doubt, Proud.
सजदा= Bowing to prayer so as to touch the ground with the forehead.
ज़ाहिर= Visible, outside, evident, open.
बुत-शिकन= Iconoclast, Idol-Breaker
बुत= Idols. A metaphor frequently used for beloved/women in Urdu poetry
बेनज़र= without eyes, 
शिकस्त= Defeat, Failure, Rout.
रायग़ाँ= Useless, Fruitless, In vain.
फ़सादी= Roitor, Dissenter
सूबा= Province, State.
सदर= President, Chief.
शरिअ'त= Islamic code of conduct.
तामील= Compliance, Submission, Execute.
बुर्क़ा= A kind of mantle or veil covering the whole body from head to toe.


सोमवार, 18 दिसंबर 2017

सरफ़राज़ियाँ !!!

बहुत ख़ूबसूरत लगी ज़िन्दगी मुझको,
जब दुनिया को बेसबब हो के देखा !
लगा न सका फ़िर कोई क़ीमत मेरी,
अनमोल हुआ जब सिफ़र हो के देखा !

एक सायबां से सीखा बेग़रज़ होना,
जब धूप में मैंने शजर हो के देखा !
देखना था उस बेशक्ल को 'फ़राज़',
सच को मैंने बेनज़र हो के देखा !

जिस्म के बग़ैर परछाईं कैसी दिखती है ,
अपने लोगों से मैंने अलग हो के देखा !
घर की दीवार भी बेजान नहीं होती,
घर को जाना जब बेघर हो के देखा !

तेरी ग़लतियों को ठहराना था जायज़,
आज मैंने भी ज़रा ग़लत हो के देखा !
अपने दामन के दाग़ भी नज़र आये,
ख़ुदको जब ख़ुद से अलग हो के देखा !

कोई आज़माइश हौसले से बड़ी नहीं होती,
हर मुश्किल को मैंने बेफ़िक्र हो के देखा !
आख़िर आ ही गईं सरफ़राज़ियाँ मेरे हिस्से
'फ़राज़' ने मर्तबा अपना ग़ज़ल हो के देखा !

|||फ़राज़|||

बेसबब = Without cause or reason. 
क़ीमत = Worth, Cost, Price, Value.
अनमोल = Rare.
सिफ़र = Zero, Naught.
सायबां = Canopy, Shade.
बेग़रज़ = Selfless.
शजर = Tree.
बेशक्ल = Faceless, The divine energy.
बेनज़र= Without sight.
बग़ैर = Without, Blind.
बेजान = Lifeless, Dead.
जायज़ = Lawfull, Legal, Right.
दामन = Hem.
दाग़ = Stigma, Spot.
आज़माइश = Test, Exam.
हौसला = Courage, Spirit, Capacity.
बेफ़िक्र= Careless.
सरफ़राज़ियाँ= Ennoblements, Blessings.
मर्तबा = Place, Class, Degree.