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बुधवार, 28 नवंबर 2018

दुआ

नीयत का साफ़दिल का सच्चा हो जाऊँ,
ऐ काश कि मैं फ़िर से बच्चा हो जाऊँ !

मज़हब का मज़हब से कोई झगड़ा न रहेगा,
तू सही हिन्दू बनमैं सही मुसलमाँ हो जाऊँ !

लिखा है बहुत सोच के ये राज़-ए-मग़फ़िरत,
हो जाऊँ जन्नती अगर मैं इंसाँ हो जाऊँ !

मेरे लिए बनाया है अल्लाह ने सबकुछ,
पी जाऊँ समंदर अगर मैं तिश्ना हो जाऊँ !

लोगों को तो ख़ुदा से भी शिकायत है आजकल,
मुझसे भी रहेगीचाहे मैं जितना अच्छा हो जाऊँ !

ज़िन्दा रहूँगा मैं सदा अशआ' में अपने,
हो जाऊँ मैं दफ़्न चाहे मैं धुआँ हो जाऊँ !

जी-हुज़ूरी का दौर है 'अल्फ़ाज़इस क़दर,
कि तोड़ दिया जाऊँ अगर मैं आईना हो जाऊँ !

||| अल्फ़ाज़ ||| 

नीयत = Intention, Purpose
मज़हब = Religion 
मुसलमाँ = The Muslim
राज़-ए-मग़फ़िरत = Secret Of Absolution/Pardon/Forgiveness
जन्नती= Dweller In Paradise
इंसाँ= Human Being, Mankind
तिश्ना = Thirsty, Insatiable, Eagerly
शिकायत = Complaint
अशआ'र= Couplets
दफ़्न= Burial
जी-हुज़ूरी= Yes Man; Sycophancy; "Yes Your Honour"
दौर= Age, Era, Time

क़दर= So Much, To Such A Degree

शनिवार, 29 सितंबर 2018

ख़त

थी इक नई जलन सीजब ख़त जला पुराना,
लपटों में दिख रहा थागुज़रा हुआ ज़माना !

सोचा कि फ़िर से इक ख़तलिख करके मैं जला दूँ,
जो भूल सब गया हैमैं भी उसे भुला दूँ !

मुश्किल ये कशमकश थीमुश्किल ये फ़ैसला था,
जब हर्फ़ वो जले थेमैं साथ में जला था !

थी राख में नुमाया उस चेहरे की बनावट,
जलकर भी मिट न पाईउन हाथों की लिखावट !

जिन उँगलियों से लिक्खेतुमने हज़ार वादे,
जिन हाथों की हिना में महके मेरे इरादे !

उस याद के धुएँ में महकी वही हिना है,
मैं जिसकी हर ख़ुशी था, वो ख़ुश मेरे बिना है !

इस राख में सुलगते हैं राज़ अब भी बाक़ी,
एहसास बुझ गए हैं, ‘अल्फ़ाज़’ अब भी बाक़ी !

||| अल्फ़ाज़ |||

ख़त= Letter
ज़माना= Time, World, Era
कशमकश= Struggle, Wrangle, Tug Of War
फ़ैसला= Decision
हर्फ़= Alphabet
राख= Ashes
नुमाया= Apparent, Conspicuous, Prominent, Visible
हिना= Henna
इरादे= Intentions, Will, Desires
एहसास= Feeling