नीयत का साफ़, दिल का सच्चा हो जाऊँ,
ऐ
काश कि मैं फ़िर से बच्चा हो जाऊँ !
मज़हब का मज़हब से कोई झगड़ा न रहेगा,
तू
सही हिन्दू बन, मैं सही मुसलमाँ हो जाऊँ !
लिखा
है बहुत सोच के ये राज़-ए-मग़फ़िरत,
हो
जाऊँ जन्नती अगर मैं इंसाँ हो जाऊँ !
मेरे
लिए बनाया है अल्लाह ने सबकुछ,
पी
जाऊँ समंदर अगर मैं तिश्ना हो जाऊँ !
लोगों
को तो ख़ुदा से भी शिकायत है आजकल,
मुझसे
भी रहेगी, चाहे मैं जितना अच्छा
हो जाऊँ !
ज़िन्दा
रहूँगा मैं सदा अशआ'र में अपने,
हो
जाऊँ मैं दफ़्न चाहे मैं धुआँ हो जाऊँ !
जी-हुज़ूरी का दौर है 'अल्फ़ाज़' इस क़दर,
कि
तोड़ दिया जाऊँ अगर मैं आईना हो जाऊँ !
||| अल्फ़ाज़ |||
नीयत
= Intention, Purpose
मज़हब
= Religion
मुसलमाँ
= The Muslim
राज़-ए-मग़फ़िरत
= Secret Of Absolution/Pardon/Forgiveness
जन्नती= Dweller
In Paradise
इंसाँ= Human Being, Mankind
तिश्ना
= Thirsty, Insatiable, Eagerly
शिकायत =
Complaint
अशआ'र= Couplets
दफ़्न= Burial
जी-हुज़ूरी= Yes Man; Sycophancy; "Yes Your Honour"
दौर= Age,
Era, Time
क़दर= So
Much, To Such A Degree