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सोमवार, 3 सितंबर 2018

मंज़िल


दूर सही, एक मंज़िल है,
धुंधला ही सही, एक साहिल है !

कुछ भी नहीं है नामुमकिन,
एक राह ज़रा सी मुश्किल है !

दुनिया की फ़िक्र में ऐ इंसाँ,
तू ख़ुद से क्यूँ इतना ग़ाफ़िल है !

मत हार, लड़ाई बाक़ी है,
जीता न सही, तू क़ाबिल है !

चादर में समेटो पैरों को,
क़िस्मत में था जितनाहासिल है !

जहाँ कोई क़दम न पहुँचा हो,
फ़राज़की वही तो मंज़िल है !

||| फ़राज़ |||

मंज़िल= Stage, Destination
साहिल= The Sea-Shore, Coast, Beach
नामुमकिन= Impossible
फ़िक्र= Concern, Thought
इंसाँ= Human, Mankind
ग़ाफ़िल= Negligent, Oblivious
क़ाबिल= Able, Competent, Deserving
हासिल= Gain, Profit

सोमवार, 4 सितंबर 2017

इश्क-ए-कामिल!

एक रूह क़ैद है मेरे जिस्म की पिंजरे में,
ऐ ख़ुदा ये क्या अज़ीयत मुझपे नाज़िल है !
मेरी नाकामियां पढ़कर मुझे कहता क़ाबिल है,
हमने तो सुना था कि ज़माना बहुत फ़ाज़िल हैं !

ऐ मुश्किलों तुमसे हर बार जीत जाता हूँ,
मेरी निगाह में हरदम मेरी मंज़िल है !
तू भी आज अपने लहू की तासीर बता,
मेरी रगों में तो मेरे अल्फाज़ शामिल हैं !

बेक़रारियाँ, रतजगे, हूक सी दिल में है,
तेरी उम्मीद में इतना तो हमें हासिल है !
बारहा मेरे होश-ओ-हवास से भी तो तू जाता रहा,
फ़िर क्यूँ तेरे ख़्वाब से मेरी पलकें बोझिल हैं !

मेरे जनाज़े पर वो मेरा ही पता पूछता है,
बहुत ही मासूम सा वो मेरा क़ातिल है !
मेरे ज़िक्र पर अब भी वो चौंक सा जाता है,
नाक़ाम ही सही 'फ़राज़', इश्क तेरा कामिल है !

|||फ़राज़|||


नाज़िल= Descend.
फ़ाज़िल= Intelligent, wise, Expert.
तासीर=Effect, Influence, Impression.
होश-ओ-हवास= All Conciousness and Sense.
कामिल= Perfect.