कुछ ख़ताएँ न की
तो फ़िर मज़ा क्या है,
फ़रिश्ता होने में
इतना भी नफ़ा क्या है !
मामला दिल का है तो फ़र्क़ पड़ता क्या है,
कि सही-ग़लत और भला-बुरा क्या है !
तेरी बाहों से जो मुझे रिहा कर दे,
ऐसी आज़ादी में भला नफ़ा क्या है !
तेरी जफ़ा को
भी सलीक़े से बयां करता
हूँ,
वफ़ा-दारी की इससे बेहतर सज़ा क्या
है !
याद
कर करके तुझको मैं ये सोचता हूँ,
कि तुझे भूल जाने का तरीका क्या है !
तेरी
याद को मेरे दिल से भुला न सके,
उस मयकदे में 'फ़राज़' नशा
क्या है !
ख़ता= Fault, Mistake
फ़रिश्ता= Angel
नफ़ा= Profit
मामला= Matter
फ़र्क़= Difference
रिहा= Release
जफ़ा= Injustice, The
Tyranny Of Beloved
सलीक़ा= Good Manners,
Discreet Of Good Disposition
बयां= Statement,
Declaration, Description, Assertion
वफ़ा-दारी= Constancy,
Fidelity
बेहतर= Better
सज़ा= Punishment
मयकदा= Bar, Tavern.