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सोमवार, 18 मार्च 2019

तय कर लेंगे !

बस शर्त ये हैतुम साथ चलो,
कितनाये कभी तय कर लेंगे !
मैं शर्त कोई फ़िर से रख दूँ,
कहनाकि कभी तय कर लेंगे !

लम्हें है मिलन केप्यार करो,
झगड़ों को कभी तय कर लेंगे !
फ़िलहाल रिवाजों को तोड़ो,
रस्मों को कभी तय कर लेंगे !

चल दिल से ख़ुदा को हम देखें,
मज़हब को कभी तय कर लेंगे !
'अल्फ़ाज़ज़रा वो हाँ कह दें,
हम रब को कभी तय कर लेंगे !

||| अल्फ़ाज़ |||

तय = Fix, Establish, Settle
शर्त = Condition
फ़िलहाल = At Present, As Of Now
रिवाज = Custom, Fashion, Practice
रस्म = Custom, Ritual
मज़हब = Religion
रब = God, Lord, The Preserver, Master 

रविवार, 9 अप्रैल 2017

तू न आया !!!

कोई आदाब-ए-वफ़ा न कभी निभाने आया,
तू जब आया तो फ़िर से छोड़ जाने आया !

जब तू आया तो एक नया ज़ख्म दिया,
कोई मरहम कभी तू न लगाने आया !

ये वक़्त-ए–आख़िर मेरा, और कंधे ग़ैरों के,
रस्म-ए-आख़िर भी न तू निभाने आया !

बहुत नाज़ था हमको वफ़ादारियों पर,
आज हम रूठे तो तू न मनाने आया !

||| फ़राज़ |||