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सोमवार, 18 मार्च 2019

तय कर लेंगे !

बस शर्त ये हैतुम साथ चलो,
कितनाये कभी तय कर लेंगे !
मैं शर्त कोई फ़िर से रख दूँ,
कहनाकि कभी तय कर लेंगे !

लम्हें है मिलन केप्यार करो,
झगड़ों को कभी तय कर लेंगे !
फ़िलहाल रिवाजों को तोड़ो,
रस्मों को कभी तय कर लेंगे !

चल दिल से ख़ुदा को हम देखें,
मज़हब को कभी तय कर लेंगे !
'अल्फ़ाज़ज़रा वो हाँ कह दें,
हम रब को कभी तय कर लेंगे !

||| अल्फ़ाज़ |||

तय = Fix, Establish, Settle
शर्त = Condition
फ़िलहाल = At Present, As Of Now
रिवाज = Custom, Fashion, Practice
रस्म = Custom, Ritual
मज़हब = Religion
रब = God, Lord, The Preserver, Master 

मंगलवार, 14 मार्च 2017

लम्हें !!!

फ़ुर्सत की अलमारी के
एक ख़ामोश से कोने में
ढूंढ रहे थे हम
न जाने यादें किसकी,
अहसासों पर से  
लम्हों की धूल हटाई
तो शाया हुए ऐसे भी वर्क़
जहाँ लम्हें महफूज़ थे
एक काग़ज़ में लिपटे !

कुछ बोलते से लफ्ज़ मिले
जिनमें लिखावट मेरी न थी
तुमने कुछ लिखा था
मेरे लिए,
कुछ नीले रंग से
तो कुछ ख़ास अहसास
लाल रंग से !

स्याहियां उम्रदराज़ हो गयीं
तेरे धड़कते अहसासों से,
लोगों के बदल जाने से
यादें नहीं बदला करतीं !

एक फूल मिला
मेरी तरह मुरझाया सा
अकेलेपन से !
कि अब ख़ुशबू न थी उसमें,
फ़िर भी यूँ महसूस हुआ
जैसे हवा का कोई झौंका
मुझतक आया है
तुमको छू कर !
और मुझमे बस गया हो
हमेशा के लिए
तुम्हारी तरह !

एक गीली सी शाम मिली
और वो पहली बारिश
जब साथ भीगे थे,
हम और तुम !
मन का वो हिस्सा
आज भी गीला है,
और मेरी पलकों को
अक्सर गीला कर जाता है,
क़तरा-क़तरा बरसता है आँखों से
और मेरे ही लिखे अल्फ़ाज़ों को
धुंधला कर जाता है !!!

||| फ़राज़ |||

रविवार, 25 दिसंबर 2016

एक ख़्वाब का सौदा !!!

हर रात मैं अपनी नींदों से
एक ख़्वाब का सौदा करता हूँ !
है ख़्वाब, तो टूट ही जाना है
पर नींदें ख़र्चा करता हूँ !

तू बनके ख़्वाब सिरहाने पर
तकिये पर अक्सर मिलता है !
हौले-हौले थपकी देकर
तू दूर कहीं ले जाता है !

जहाँ वक़्त के धागे लम्हों को
बंधन में बाँध नहीं पाते !
जहाँ उम्र थमी है बरसों से
जहाँ साथ थी भीगी बरसातें !

कुछ लम्हे जो थे ख़्वाब हुए
अब ख़्वाब में अक्सर मिलते हैं !
एक हसरत की सूरत बनकर
अहसास से बनकर मिलते हैं !

चादर पर सिलवट के जैसा तू
मन में सिलवट दे जाता है !
पलकों की मुंडेरों को तू
फिर से तर कर जाता है !

हर रात मैं अपनी नींदों से
एक ख़्वाब का सौदा करता हूँ !
है ख़्वाब, तो टूट ही जाना है
पर नींदें ख़र्चा करता हूँ !


|||फ़राज़|||