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शनिवार, 2 मार्च 2019

दुआ

ज़िन्दगी की किसीको दुआ दीजिये,
क़ैद में हों परिंदेउड़ा दीजिये !

माफ़ कर दें तो बे-शक बड़े आप हैं,
दुश्मनों को भी कोई दुआ दीजिये !

हूँ नशे में नसीहत नहीं कीजिये,
होश आये जो चाहे सज़ा दीजिये !

आप दिल से जो देंहमको मंज़ूर है,
न दुआ दे सकेंबद्दुआ दीजिये !

हमको अच्छों का अच्छा नहीं तजरबा,
हमको हमसा ही कोई बुरा दीजिये !

पहले 'अल्फ़ाज़को पढ़ तो लीजे ज़रा,
उसके बारे में फिर फ़ैसला दीजिये !

||| अल्फ़ाज़ |||

बे-शक = Doubtlessly, निसंदेह
नसीहत = Advice, Counsel, सदुपदेश, सीख, अच्छी सलाह,
होश = Sense, चेतना
मंज़ूर = Admired, Accepted, स्वीकार
बद्दुआ = Curse, श्राप
तजरबा = Experience, अनुभव
फ़ैसला = Decision, निर्णय

मंगलवार, 3 जुलाई 2018

तसल्ली !!!

महज़ कांटे ही महफ़ूज़ हैं इस ज़माने में,
फूल तो मसल जाते हैं राहों को सजाने में !

कभी अपनों की शिकायत ग़ैरों से कीजिये,
कोई पीछे न रहेगा आग लगाने में !

इतना महँगा भी नहीं है तसल्ली देना,
इतना ख़र्चा भी नहीं है मुस्कुराने में !

कोई अपना रूठ जाए तो उसे मना लेना,
एक उम्र लगती है रिश्तों को बनाने में !

नफ़रत अगर चाहिए तो मुफ़्त मिलेगी,
मगर प्यार ख़र्च होता है प्यार कमाने में !

इक़रार न सही तो इंकार ही सही,
कुछ तो हासिल होगा दिल आज़माने में !

तुझे याद तो महज़ इसलिए करता हूँ,
मुझे आराम मिलता है दिल जलाने में !

तेरी हसरत तो करता हूँज़िद नहीं करता,
कोई बुराई तो नहीं तुझे इस तरह चाहने में !

गुनाह तो तब है कि जब मयकशी की जाये,
कोई गुनाह नहीं 'फ़राज़मयकदे जाने में !

||| फ़राज़ |||

महज़ = Merely, Only
महफ़ूज़ = Safe
ज़माना = World, Era
शिकायत = Complaint, Lamentation
ग़ैर = Stranger, Rival, Outsider 
तसल्ली = Solace, Consolation, Comfort
ख़र्चा = Expense
नफ़रत = Hate
इक़रार = Consent, Pledge
इंकार = Denial, Refusal
हासिल = Gain, Result
आज़माना = Try, Test
हसरत = Desire
ज़िद = Insistence
गुनाह = Sin, Crime, Fault
मयकशी = Boozing, To Drink
मयकदे= Bar, Tavern