मंगलवार, 28 नवंबर 2017

मशवरा !!!

मयकशी नहीं सबब मयकदे में आने का,
मैं तो एक रिंद से इस्लाह लेने आया हूँ !
अब उसकी मर्ज़ी है कि मर्ज़ दे या शिफ़ा,
मैं तो दर्द-ए-दिल की दवा लेने आया हूँ !

अपने क़ातिल को ही हाकिम है बनाया मैंने,
उससे ही उसके जुर्म की सज़ा लेने आया हूँ !
अब तू कहे तो जियूं, या तू कहे तो मर जाऊं,
अपने अंजाम का तुझसे मशवरा लेने आया हूँ !

मुझे पहचान कर फ़िर से नज़रअंदाज़ कर दे,
गाहक पुराना हूँ, मैं दर्द नया लेने आया हूँ !
राहतें रास नहीं आतीं हैं अब मेरे दिल को,
तू फ़िर बेरुख़ी कर, मैं हादसा लेने आया हूँ !

यूँ न जाऊँगा मैं आज मस्जिद को छोड़कर,
आज सवाब नहीं, आज मैं ख़ुदा लेने आया हूँ !
ये अश’आर तो बस बहाना है मुलाक़ात का,
मैं तो बस अपनों की दुआ लेने आया हूँ !

|||फ़राज़|||

मयकशी= Boozing.
मयकदा= Bar, Tavern.
रिंद= Drunkard.
इस्लाह= Correction, Revision, Reform.
मर्ज़ी= Choice, Consent.
मर्ज़= Sickness, Disease, Infirmity.
शिफ़ा= Healing, Cure, Recovery.
दर्द-ए-दिल= Heart's Grief, Heartache, Sorrow, Anguish.
क़ातिल= Murderer, Killer, Assasin.
हाकिम= Judge, Ruler, Master. 
मशवरा= Counsel, Consultation.
नज़रअंदाज़= Ignore, Overlook
गाहक= Customer, 
राहत= Comfort, Ease, Rest.
रास= Be suitable.
बेरुख़ी= Ignorance
हादसा= Calamity.
सवाब= Reward of good deeds
अश’आर= Couplet.

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