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रविवार, 5 नवंबर 2017

हस्ती !!!

तू धूल चढ़ा रहा था मुझपर लेकिन
देख हवा चली और मैं ग़ुबार हो गया !

तू फेंकता रहा मुझपर कंकर पत्थर
मैं हुनरमंद था, देख मैं मीनार हो गया !

क़फ़स न क़ैद कर सकी मेरी आवाज़ को
एक कलम के ज़रिये मैं अख़बार हो गया !

मुझको आता है हुनर तूफ़ान से खेलने का
चिंगारी था मैं, आँधियों में अंगार हो गया !

एक तू कि अपनों को भी मरहम न दे सका 
एक मैं कि ग़ैरों का भी ग़मख़्वार हो गया !

मैंने सुना था कि इश्क़ है ज़रिया सवाब का
हसरत-ए-सवाब में मैं गुनाहगार हो गया !

आज फ़िर शहर में हमारा चर्चा क्यूँ है
क्या कोई ख़बरनवीस मेरा यार हो गया !

वो बेचता रहा हस्ती शोहरत के बाज़ार में
देख मेरे कलाम ख़ुद मेरा इश्तिहार हो गया !

बस पड़ोसी के लिए दुआ ही तो की थी
क्यूँ भला मैं वतन का ग़द्दार हो गया !

ये ज़िन्दगी तो सदा किराए का घर रही
ज़ेर-ए-कब्र तो मैं भी ज़मींदार हो गया !

|||फ़राज़|||

ग़ुबार= Dust Storm.
हुनरमंद= Skilled
मीनार= Minaret.
क़फ़स= Prison, Cage.
कलम= Pen.
हुनर= Skill. Art, Knowledge.
चिंगारी= Spark, Scintilla.
मरहम= Ointment, Remedy.
ग़ैर= Stranger,
ग़मख़्वार= Consoler. Sympathizer.
इश्क़= Love.
सवाब= Reward of good deeds
हसरत-ए-सवाब= Desire of the reward for good deeds
गुनाहगार= Sinner, Guilt, Criminal, Culprit.
शहर= City.
चर्चा= Gossip, Rumor.
ख़बरनवीस= Journalist
यार= Friend
हस्ती= Existence, Life.
शोहरत= Fame, Renown.
बाज़ार= Market
कलाम= Word, Speech,
इश्तिहार= Advertisement, Notification.
ग़द्दार= Disloyal, Traitor.
ज़ेर-ए-कब्र= Under the Grave
ज़मींदार= Landlord