सोमवार, 10 दिसंबर 2018

ज़िन्दगी

ख़ुद अपने हर सवाल का जवाब ज़िन्दगी,
समझो तो हक़ीक़त है वरना ख़्वाब ज़िन्दगी !

दुश्वारियाँ हैं लेकिनहै फ़िर भी ख़ूबसूरत,
काँटों के दरमियान है गुलाब ज़िन्दगी !

जैसी हुई हिदायतवैसी गुज़ारी हमने ,
न जाने है गुनाह या सवाब ज़िन्दगी !

अपने ही फ़ैसलों काहासिल है हर नतीजा,
अपने ही हर किये का हिसाब ज़िन्दगी !

उतरे हैं बारी-बारी हर चेहरे से मुखौटे,
बुरे वक़्त में हटाती है नक़ाब ज़िन्दगी !

ख़ुद से जो की मोहब्बततब पाई मैंने राहत,
दिल मुस्कुरा के बोलाआदाब ज़िन्दगी !

फ़ुर्सत कभी मिले तोपन्नों को मेरे पलटो,
'अल्फ़ाज़है खुली हुई किताब ज़िन्दगी !

||| अल्फ़ाज़ |||

हक़ीक़त = Reality, Truth
दुश्वारियाँ = Difficulties 
दरमियान = Middle, Between
हिदायत = Leading One Into The Right Way (In A Literal Or Religious Sense); Guidance, Direction
सवाब = Recompense, Compensation, Reward (Especially, Of Obedience To God)
फ़ैसला = Decision
नतीजा = Result, Consequence, Inference, Conclusion
हिसाब = Computation, Calculation, Account
बारी बारी = One By One
मुखौटा = Mask
नक़ाब = Fem, Veil
मोहब्बत = Friendship, Love, Affection, Amour
राहत = Comfort, Ease
आदाब =  Salutations
फ़ुर्सत = Leisure, Freedom, Rest

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें