इतना जल्दी न दिल में बसा लीजिये,
थोड़ा उनका भी तो इम्तिहाँ लीजिये !
देखिये वो निगाहों का ठग तो नहीं,
यूँही ख़तरा न दिल का उठा लीजिये !
बात करता है तो बात कर लीजिये,
अपनी आदत न उसको बना लीजिये !
जीत लेने में उनको मज़ा है मगर,
कश्मकश का भी तो कुछ मज़ा लीजिये !
ज़ुल्फ़ को अपने रुख़ से हटा लीजिये !
तमन्नाई के दिल की दुआ लीजिये,
कौन कहता है दिल को लगा लीजिये,
दिल्लगी का भी तो कुछ मज़ा लीजिये !
गर्मियाँ उनके एहसास में ख़ूब हैं,
आप इन सर्दियों का मज़ा लीजिये !
जनवरी की तरह वो ज़रा दूर है,
बस दिसंबर सब्र से बिता लीजिये
सिर्फ़ दिल के कहे पे न ‘अल्फ़ाज़’ चल,
कुछ ज़हन का भी तो मशवरा लीजिये !
||| अल्फ़ाज़ |||
इम्तिहाँ = Test, Exam
ठग = Cheat, Fraud
ख़तरा = Risk, Danger,
कश्मकश = Struggle, Wrangle, Tussle
ज़ुल्फ़ = A Curling Lock (Of Hair)Hanging Over The Temple Or Ear, Tresses
रुख़ = Face, Appearance, Direction, Features
तमन्नाई = Desirer, Requestor
दिल्लगी = Amusement, Merriment
एहसास = Feeling, Perception
ख़ूब = Good, Well, Beautiful, Pleasant
सब्र = Patience, Endurance
ज़हन = Mind, Knowledge
मशवरा = Counsel, Consultation
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