माना
कि है गुनाह तो गुनाह कीजिये,
इश्क़
कीजिये अगर तो बे-पनाह कीजिये !
आने
वाले ज़माने तेरा नाम लें,
जो
भी कीजे वो बे-इंतिहा कीजिये !
चाह
रखोगे जो, वो मिलेगा तुम्हें,
जो
ना सोचा किसीने वो चाह कीजिये !
शम्स देता है ज्यूँ बे-ग़रज़ रौशनी,
इमदाद कुछ इस तरह कीजिये !
राह
के पत्थरों को हटाते चलो,
काम
कोई कभी बेवजह कीजिये !
गुड्डे-गुड़ियों के जैसा नहीं खेल ये,
निभा
पाएँ अगर तो निकाह कीजिये !
है हक़ीक़त तो तस्लीम कर लीजिये,
अपनी हसरत से ऐसे सुलह कीजिये !
तारीफ़ कीजिये नहीं. सच बता दीजिये,
'अल्फ़ाज़' में असर हो तो वाह कीजिये !
||| अल्फ़ाज़ |||
गुनाह
= Sin, Crime
बे-पनाह
= Boundless, Limitless, Unlimited
बे-इंतिहा
= Infinite, Endless
शम्स
= The Sun
ज्यूँ
= Like That
बे-ग़रज़
= Selfless, Without Any Interest
इमदाद
= Donation, Gift, Help, Support
बेवजह
= Without Reason
गुड्डा
= Doll, Puppet; An Effigy (The Figure Being That Of A Man)
निकाह
= Matrimonial Bond, Marriage
हक़ीक़त
= Reality, Truth
तस्लीम
= Surrender, Accept, Acknowledge
हसरत
= Desire
सुलह
= Peace, Treaty,
तारीफ़
= Praise, Admiration,
असर
= Effect, Impression
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