imdad लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
imdad लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शुक्रवार, 7 दिसंबर 2018

सलाह

माना कि है गुनाह तो गुनाह कीजिये,
इश्क़ कीजिये अगर तो बे-पनाह कीजिये !

आने वाले ज़माने तेरा नाम लें,
जो भी कीजे वो बे-इंतिहा कीजिये !

चाह रखोगे जो, वो मिलेगा तुम्हें,
जो ना सोचा किसीने वो चाह कीजिये !

शम्स देता है ज्यूँ बे-ग़रज़ रौशनी,
इमदाद कुछ इस तरह कीजिये !

राह के पत्थरों को हटाते चलो,
काम कोई कभी बेवजह कीजिये !

गुड्डे-गुड़ियों के जैसा नहीं खेल ये,
निभा पाएँ अगर तो निकाह कीजिये !

है हक़ीक़त तो तस्लीम कर लीजिये,
अपनी हसरत से ऐसे सुलह कीजिये !

तारीफ़ कीजिये नहीं. सच बता दीजिये,
'अल्फ़ाज़' में असर हो तो वाह कीजिये !

||| अल्फ़ाज़ |||

गुनाह = Sin, Crime
बे-पनाह = Boundless, Limitless, Unlimited
बे-इंतिहा = Infinite, Endless
शम्स = The Sun
ज्यूँ = Like That
बे-ग़रज़ = Selfless, Without Any Interest
इमदाद =  Donation, Gift, Help, Support
बेवजह = Without Reason
गुड्डा = Doll, Puppet; An Effigy (The Figure Being That Of A Man)
निकाह = Matrimonial Bond, Marriage
हक़ीक़त = Reality, Truth
तस्लीम = Surrender, Accept, Acknowledge
हसरत = Desire
सुलह = Peace, Treaty,
तारीफ़ = Praise, Admiration,
असर = Effect, Impression