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बुधवार, 2 जनवरी 2019

बे-सल्तनत सुल्तान

लुटने की मुझको फ़िक्र क्याबे-साज़-ओ-सामान हूँ,
लोगों के दिल में घर मेराबे-सल्तनत सुल्तान हूँ !

है तू अगर इन्सान तो समझेगा मेरी बेबसी
करता हूँ मैं भी ग़लतियाँमैं भी तो बस इन्सान हूँ !

मुझको भी है दरकार हर रिश्ते से कुछ न कुछ नफ़ा
कुछ मैं भी रिश्वत-ख़ोर हूँकुछ मैं भी बेईमान हूँ !

करता नहीं मैं तब से ज़ाया एक लम्हा ज़िन्दगी.
जिस पल समझ आया कि बस एक पल का मैं मेहमान हूँ !

मुझमें दफ़्न हैं तेरी यादेंतेरी क़समेंऔर तू,
अपनी वफ़ा की लाश का मैं आप क़ब्रिस्तान हूँ !

कुरआन में भी तो नहीं अल्लाह का सारा बयाँ,
जितना ख़ुदा को जाना हैमैं उतने में हैरान हूँ !

आँखों के पानी से मैं सींचूँ किस तरह अपनी ज़मीं,
ख़ुद-कुश नहींमजबूर हूँमैं हिन्द का किसान हूँ !

कश्मीर तो मैं अब भी हूँजन्नत मगर मैं न रहा,
हर रोज़ ताज़ी क़ब्र और जलता हुआ शमशान हूँ !

'
अल्फ़ाज़मैं हूँ आईनाकहता हूँ सच मैं हू-ब-हू,
लिखता तो हूँ पेचीदगीपढ़ने में मैं आसान हूँ !

||| अल्फ़ाज़ |||

बे-साज़-ओ-सामान= Without Luggage Wherewithal (ख़ाली हाथ)
बे-सल्तनत= Without Empire (राज्यविहीनबिना राज्य का)
सुल्तान= Emperor (शासकराजा)
बेबसी= Helplessness (लाचारीविवशता)
ग़लतियाँ= Mistakes (भूलदोष)
दरकार= Required, Need (आवश्यकता)
नफ़ा= Profit, Gain (लाभ)
रिश्वत-ख़ोर= Corrupt (भ्रष्ट)
बेईमान= Cheat, Dishonest, Fraudulent, Knave
ज़ाया= Waste (व्यर्थ)
लम्हा= Moment (पलक्षण)
मेहमान= Guest (अतिथि)
दफ़्न= Buried
वफ़ा=  Fidelity, Faithfulness, Love, Loyalty (प्रेमनिष्ठा)
लाश= Dead Body, Corpse, Carcass (शव)
क़ब्रिस्तान= A Burial Ground, Cemetery, Graveyard
कुर'आन= Holy Quran, The Islamic Holy Book
बयाँ= Statement, Declaration, Description, (विवरणवर्णनउल्लेख)
हैरान= Confounded, Astonished, Perplexed, Amazed (हतप्रभचकित)
सींचना= To Irrigate/Water 
ज़मीं= Soil, Land, (भूमिधरती)
ख़ुद-कुश= Suicider, One Who Commits Suicide (स्वहंताआत्महंता)
मजबूर= Compelled, Forced, Oppressed, Constrained, (विवश)
हिन्द= India (हिन्दुस्तानभारत)
ताज़ी= Fresh, New 
क़ब्र= Grave
शमशान= Crematorium, The Place For Burning Pyres
हू-ब-हू= Exactly, Quite Perfectly (यथातथ्यसदृष्य)
पेचीदगी= Complexity (जटिलता)

सोमवार, 26 फ़रवरी 2018

!!! फ़राज़-किरदारी !!!

बोहतान मुझपर कभी छोटा नहीं लगता,
अपनी भी शहर में मेयारी तो अभी बाक़ी है !

रिश्वत ही देनी है तो तू फ़िरदौस ले के आ,

मेरी भी फ़राज़-किरदारी तो अभी बाक़ी है !

तू तो क़र्ज़दार है मेरा, तू मुझे क्या देगा,
तेरे माज़ी पर मेरी उधारी तो अभी तो बाक़ी है !

महज़ क़ानून बना देने से जरायम नहीं रुकने वाले,
मेरे मुल्क में भूख और बेरोज़गारी तो अभी बाक़ी है !

मुकम्मल रश्क़ ज़ाया कर तू मेरी ग़ज़लों पर,
मेरे कलम की नग़मानिगारी तो अभी बाक़ी है !

पापा अक्सर ये सोचकर नए कपड़े नहीं लाते,
कि मेरे बच्चों की ख़रीदारी तो अभी बाक़ी है !

तुम अभी न दो मुझे उस्ताद का दर्जा,
मेरे कलाम की शाहकारी तो अभी बाक़ी है !

हाथ फैलाएगा तो सिर्फ़ अल्लाह के सामने,
'फ़राज़' में इतनी ख़ुद्दारी तो अभी बाक़ी है !

||| फ़राज़ |||

बोहतान= False accusation, Calumny
शहर= City
मेयारी= Qualitative, Standard
रिश्वत= Bribe
फ़िरदौस= The highest layer of heaven/Paradise.
फ़राज़-किरदारी= Elevated character.
क़र्ज़दार= Indebted, Debtor
माज़ी= Past
उधारी= Debt, Loan
बाक़ी= Remaining
महज़= Merely, Only.
क़ानून= Law, Stature, Rule. 
जरायम= Crimes, Sins.
मुल्क= Country
बेरोज़गारी= Unemployment.
मुकम्मल= Complete
रश्क़= Jealousy, Envy.
ज़ाया= Waste
कलम= Pen
नग़मानिगारी= Song/Lyrics writing.
ख़रीदारी= Shopping
उस्ताद=  Teacher, Mentor
दर्जा= Class, Rank, Grade.
कलाम= Word, Speech
शाहकारी= Masterpiece.
ख़ुद्दारी= Self-respect