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सोमवार, 26 फ़रवरी 2018

!!! फ़राज़-किरदारी !!!

बोहतान मुझपर कभी छोटा नहीं लगता,
अपनी भी शहर में मेयारी तो अभी बाक़ी है !

रिश्वत ही देनी है तो तू फ़िरदौस ले के आ,

मेरी भी फ़राज़-किरदारी तो अभी बाक़ी है !

तू तो क़र्ज़दार है मेरा, तू मुझे क्या देगा,
तेरे माज़ी पर मेरी उधारी तो अभी तो बाक़ी है !

महज़ क़ानून बना देने से जरायम नहीं रुकने वाले,
मेरे मुल्क में भूख और बेरोज़गारी तो अभी बाक़ी है !

मुकम्मल रश्क़ ज़ाया कर तू मेरी ग़ज़लों पर,
मेरे कलम की नग़मानिगारी तो अभी बाक़ी है !

पापा अक्सर ये सोचकर नए कपड़े नहीं लाते,
कि मेरे बच्चों की ख़रीदारी तो अभी बाक़ी है !

तुम अभी न दो मुझे उस्ताद का दर्जा,
मेरे कलाम की शाहकारी तो अभी बाक़ी है !

हाथ फैलाएगा तो सिर्फ़ अल्लाह के सामने,
'फ़राज़' में इतनी ख़ुद्दारी तो अभी बाक़ी है !

||| फ़राज़ |||

बोहतान= False accusation, Calumny
शहर= City
मेयारी= Qualitative, Standard
रिश्वत= Bribe
फ़िरदौस= The highest layer of heaven/Paradise.
फ़राज़-किरदारी= Elevated character.
क़र्ज़दार= Indebted, Debtor
माज़ी= Past
उधारी= Debt, Loan
बाक़ी= Remaining
महज़= Merely, Only.
क़ानून= Law, Stature, Rule. 
जरायम= Crimes, Sins.
मुल्क= Country
बेरोज़गारी= Unemployment.
मुकम्मल= Complete
रश्क़= Jealousy, Envy.
ज़ाया= Waste
कलम= Pen
नग़मानिगारी= Song/Lyrics writing.
ख़रीदारी= Shopping
उस्ताद=  Teacher, Mentor
दर्जा= Class, Rank, Grade.
कलाम= Word, Speech
शाहकारी= Masterpiece.
ख़ुद्दारी= Self-respect