मंगलवार, 3 अक्टूबर 2017

पहली नज़र !!!

काम जो पहली नज़र कर गई,
समझने में मेरी सारी उम्र गई!

वो यूँ संवर के सामने आया मेरे,
वक़्त की जैसे गर्दिश ठहर गई!

जाने किस रंग में वो रंग लेता है,
रंगत-ए-दिल-ए-नाशाद निखर गई!

उसने हिना से जो मेरा नाम लिखा,
मेरी तक़दीर उसकी हथेली पर उभर गई!

उसने जाते हुए मुड़ कर कुछ यूँ देखा,
रूठती क़िस्मत जैसे फ़िर से संवर गई!

देख कर उसने कुछ यूँ झुका ली नज़रें,
मत पूछ क्या मेरे दिल पर गुज़र गई!

उसकी तस्वीर से भी अब इश्क़ हो चला है,
ताकते हुए उसको शाम-ओ-सहर गई!

मेरे इश्क़ की तबस्सुम है उसके लबों पर,
'फ़राज़' आज तो तेरी झोली ही भर गई!

|||फ़राज़|||

गर्दिश= Circulation, Misfortune, Revolution
रंगत-ए-दिल-ए-नाशाद= Colour/Condition of disappointed heart.
शाम-ओ-सहर= Night and Day, Round the clock
तबस्सुम= Smile

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