बुधवार, 9 अगस्त 2017

ज़िद!!!

डूब कर तो देख तू ख़ुद में
तुझको किनारा मिल जायगा !
अपनी तलाश में निकल तो सही
तुझको जहान सारा मिल जायगा !

तेरी ज़िद से ही गुज़रते हैं
तेरे जूनून के सब रास्ते,
तू गौर से तो देख ज़रा
मंज़िल का इशारा मिल जायगा !

महसूस कर हर जलन को
तू जल के नूर हो जा,
ज़िन्दगी की अलसुबह का
पुरनूर नज़ारा मिल जायगा !

इकलौता चाँद फ़लक का
सबको तो न मयस्सर होगा,
तुझको भी तेरे नसीब का
रौशन सितारा मिल जायगा !

कभी फ़ुर्सत से पलटना
तुम र्क़ मुझ बशर के,
मेरी हंसी की परतों में 
एक दर्द का मारा मिल जायगा !

वक़्त ने बदल दी हैं 'फ़राज़'
हमारी सूरतें और सीरतें ,
फ़ासला अब कम न होगा
अगरचे तू दोबारा मिल जायगा !

||| फ़राज़ |||

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