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बुधवार, 30 मई 2018

बारिश !!!

ख़्वाहिशों ने बादलों से,
चुपके से साज़िश की थी !
एक शाम तुम भी साथ थी,
और बारिश भी थी !

सर्द हवाओं ने,
एहसासों को हवा दी थी !
बारिश की बूंदों में,
जज़्बातों की आंच सी थी !

जब क़ुर्ब हासिल हो जाये,
ख़ामोश दो निगाहों से !
मिलते हैं ऐसे मौसम,
'फ़राज़' बड़ी दुआओं से !

||| फ़राज़ |||

ख़्वाहिश= Wish, Desire
साज़िश= Conspiracy
सर्द= Cold
एहसास= Feeling, Perception
जज़्बात= Emotions, Feelings
आंच= Flame, Warmth,
क़ुर्ब= Vicinity, Nearness,
हासिल= Gain
ख़ामोश= Silent



सोमवार, 10 अप्रैल 2017

माँ !

एक दुआ सी मिली मुझको बादल छूकर,
आज अब्र आया था माँ का आँचल छूकर !

||| फ़राज़ |||

गुरुवार, 23 मार्च 2017

तन्हा !!!

स्याह रात और हवाएं तन्हा,
स्याहियों से उलझी मेरी सदायें तन्हा !
कोई बादलों के पार नहीं रहता शायद,
लौट आती हैं मेरी ख़ामोश दुआएं तन्हा !

अक्सर मेरी ख़ामोशियों में शोर बनके,
चीख़ती रहती हैं मेरी आहें तन्हा !
तेरी राहों से मिले महज़ पांव के छाले,
लौटकर जब आयीं बेज़ार निगाहें तन्हा !

इस रु-ए-ज़मीं तक तुझको तलाश कर,
लौट आयीं मेरी नाकाम निगाहें तन्हा !
न तलब-ए-वफ़ा, न शिक़वा रंजिशों से,
बेकैफ़ सफ़र, बेकैफ़ सी राहें तन्हा !!!

||| फ़राज़ |||

रु-ए-ज़मीं= End of the world
बेकैफ़= = joyless, languid