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शुक्रवार, 20 अक्टूबर 2017

दिवाली !!!

इस दिवाली अँधेरा कुछ यूँ मिटाया मैंने,
एक दिया मस्जिद में भी जलाया मैंने !

मज़हबी दीवार में खोल के मन की खिड़की,
मंदिर को मस्जिद से कुछ यूँ मिलाया मैंने !

एक रूठा हुआ दोस्त फ़िर नज़र आया,
भूलकर शिक़ायतें गले उसको लगाया मैंने !

एक दिये की लौ में जब तू नज़र आया,
हर दिया फ़िर तुझे याद करके जलाया मैंने !

ग़रज़ थी अपने पड़ोस को खुशबू से भरना,
घर अपना उनके लिए था महकाया मैंने !

पड़ोसी की एक दीवार भी सज गई थी,
यूँ तो घर बस अपना था सजाया मैंने !

तेरे आँगन में भी फल और छाँव देगा,
शजर जो अपने आँगन में है लगाया मैंने !

माना कि जायज़ नहीं मुसलमान पर लेकिन,
उस्ताद के पैरों को हाथ था लगाया मैंने !

|||फ़राज़|||

मज़हबी= Religious.
ग़रज़= Intention, Purpose.
शजर= Tree
जायज़= Legitimate. Prevailing.
उस्ताद= Teacher. 

बुधवार, 18 अक्टूबर 2017

सलाह !!!

हर हार को तुम कुछ यूँ हरा देना,
मुश्किल जो आ जाये तो मुस्कुरा देना !

क्या ख़बर तुझे इसी राह से लौटना भी हो,
रास्ते के हर पत्थर को तुम हटा देना !

इससे बेहतर इबादत क्या होगी मौलवी साहब,
दो प्यार करने वालों को मिला देना !

दुआ अगर अर्श तक पहुँचाना चाहो,
क़ैद परिंदों को तुम उड़ा देना !

तेरा सिक्का न चलेगा बाद मरने के,
क़र्ज़ ज़िन्दगी में सभी तुम चुका देना !

बात दिल की हो तो दिल में रखना,
अगर कोई दिल से पूछे तो बता देना !

होके मदहोश तो वो सच बोलेगा ही,
'फ़राज़' को धोखे से तुम पिला देना !

अहवाल अगर वो मेरा दरयाफ़्त करे,
मेरे अशआर तुम उसको सुना देना !

वो फ़िर मिलेगा एक नया चेहरा लेकर,
आइना टूटा हुआ उसको दिखा देना !

कुछ तो गुनाह तेरे माफ़ हो जायेंगे ज़रूर,
किसी रोते हुए बच्चे को तू हँसा देना !

रौशनी महदूद न रहे महज़ दिवाली तक,
चराग़ हर अमावास रात में तुम जला देना !

|||फ़राज़|||

इबादत= Prayer, Adoration.
अर्श= Sky
क़ैद= Imprisonment, Bondage,
परिंदे= Birds
क़र्ज़= Debt, Loan.
मदहोश= Intoxicated.
अहवाल= Condition, State, Circumstance.
दरयाफ़्त= Inquiry, Investigation.
महदूद= Bound, Restrict.
महज़= Merely, Only.
चराग़= An oil lamp.