अक्सर अंधेरों में अपनी परछाईं ढूँढ़ता
हूँ,
मुझे भी झूठ पसंद है, मगर
सच्चाई ढूँढ़ता हूँ !
ढूंढता हूँ मैं कोई हक़ बात कहने वाला,
गूंगों के शहर
में मैं गोयाई ढूंढता
हूँ !
तू दे सके तो मुझको, कुछ
वक़्त दे दिया कर,
सस्ती सी ज़िन्दगी में महंगाई ढूंढता
हूँ !
धोखे नज़र ने खाए तो बदला है नज़रिया,
अब आँख बंद कर के बीनाई ढूंढता
हूँ !
रहबर की रहबरी से भटका हूँ इस क़दर मैं,
रहज़न से इल्म लेकर रहनुमाई ढूंढता
हूँ !
एक तू कि फूल में भी, है ऐब ढूंढ लेता,
एक मैं कि ख़ार में भी रानाई ढूंढता
हूँ !
अक्सर ही दिल्लगी को समझा मैं इश्क़दारी,
दरिया के साहिलों पर
गहराई ढूंढता हूँ !
अब लग़्ज़िशें भी मेरी छुपती नहीं छुपाये ,
मैदान-ए-हश्र में मैं
तन्हाई ढूंढता हूँ !
यूँ तो तलाश मेरी, है अब
तलक अधूरी,
'फ़राज़' मैं
इन्सान में अच्छाई ढूँढ़ता हूँ !
||| फ़राज़ |||
हक़= Truth
गूंगा= Deaf-Mute
गोयाई= Speaking
नज़रिया= Perspective, Ideology
बीनाई= Vision, Eye-Sight
रहबर= Guide, Conductor
रहबरी= Guidance
क़दर= Amount
रहज़न= Robber
इल्म= Knowledge
रहनुमाई= Leadership, Guidance
ऐब= Defect, Imperfection
ख़ार= Thorn, Thistle
रानाई= Beauty, Grace, Tenderness
इश्क़दारी= Love
दरिया= River
साहिल= The Sea-Shore, Beach, Coast
लग़्ज़िश= Error,
Mistake, Sin
मैदान-ए-हश्र= Field/Arena Of Doomsday
तलाश= Search