मासूम सा दिखता हूँ,
मैं अच्छा सा हो जाता हूँ !
माँ की गोद में फ़िर
मैं बच्चा सा हो जाता हूँ !
मुझको न कोई अँधेरा
कभी बेनूर कर सका !
माँ जब दुआ करती है
मैं उजला सा हो जाता हूँ !
मुझको बिखेरती हैं अक्सर
दुनिया की उलझनें !
माँ सर पर हाथ रखती है
और मैं संवर सा जाता हूँ !
कभी ख़्वाब में जो
कोई हक़ीकत डराती है !
माँ देती है थपकियाँ
और मैं सो जाता हूँ !
||| फ़राज़ |||
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