एक
मुश्किल मेरी जैसे हल हो गई,
याद
तुझको किया और ग़ज़ल हो गई !
क़ाफ़िया चाहिए हमको हर लफ्ज़ का,
शायरी
यूँ हमारा शग़ल हो गई !
फ़र्क़ पड़ता है क्या कैसा दिखता है तू,
अब
मोहब्बत मेरी बे-शक्ल हो गई !
तूने
तोड़ी क़सम, फ़िर भी
जिंदा हैं हम,
आस बस इक
ज़रा सी क़तल हो गई !
तेरे
दिल में ठिकाना न मेरा रहा,
मेरे
दिल से भी तू बे-दख़ल हो गई !
सब ख़ताएँ तो 'अल्फ़ाज़'
की ही नहीं,
जैसी सोहबत थी वैसी अक़ल हो गई !
||| अल्फ़ाज़ |||
क़ाफ़िया
= Rhyme, The Last Or Second
Last Words Of Each Verse Is Called Qafiya, तुकांत
लफ्ज़
= Word, शब्द
शग़ल
(शग़्ल) = Hobby, काम, व्यस्तता
फ़र्क़
= Difference, अन्तर
बे-शक्ल
= Faceless,
आस
= Hope, आशा, उम्मीद
क़तल
(क़त्ल) = Murder, हत्या
बे-दख़ल
= Disinherit, Dislodge, Evict, निष्कासित अधिकारच्युत
ख़ता = Mistake, Fault, दोष
सोहबत = Association, Company, संगत
अक़ल, अक़्ल = Wisdom,
Knowledge, बुद्धि, विवेक