shaghl लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
shaghl लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शनिवार, 22 जून 2019

ग़ज़ल

एक मुश्किल मेरी जैसे हल हो गई,
याद तुझको किया और ग़ज़ल हो गई !

क़ाफ़िया चाहिए हमको हर लफ्ज़ का,
शायरी यूँ हमारा शग़ल हो गई !

फ़र्क़ पड़ता है क्या कैसा दिखता है तू,
अब मोहब्बत मेरी बे-शक्ल हो गई !

तूने तोड़ी क़समफ़िर भी जिंदा हैं हम,
आस बस इक ज़रा सी क़तल हो गई !

तेरे दिल में ठिकाना न मेरा रहा,
मेरे दिल से भी तू बे-दख़ल हो गई !

सब ख़ताएँ तो 'अल्फ़ाज़' की ही नहीं,
जैसी सोहबत थी वैसी अक़ल हो गई !

||| अल्फ़ाज़ |||

क़ाफ़िया = Rhyme, The Last Or Second Last Words Of Each Verse Is Called Qafiya, तुकांत
लफ्ज़ = Word, शब्द
शग़ल (शग़्ल) = Hobby, काम, व्यस्तता
फ़र्क़ = Difference, अन्तर
बे-शक्ल = Faceless, 
आस = Hope, आशा, उम्मीद
क़तल (क़त्ल) = Murder, हत्या
बे-दख़ल = Disinherit, Dislodge, Evict, निष्कासित अधिकारच्युत
ख़ता = Mistake, Fault, दोष
सोहबत = Association, Company, संगत
अक़लअक़्ल = Wisdom, Knowledge, बुद्धिविवेक