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बुधवार, 26 जून 2019

क़रार


जो कहा नहींजो सुना नहीं,
जो किसी ग़ज़ल में बयाँ नहीं !

वो जो हममें तुममें क़रार था,
हालात के आगे टिका नहीं !

पिंजरा तो उसने खोल दिया,
उड़ सकता था मैं उड़ा नहीं !

शायद उसको जाना ही था,
आवाज़ दी पर वो रुका नहीं !

शीशा गल के जुड़ सकता है,
दिल टूटा तो फ़िर जुड़ा नहीं !

ता'वीज़ दो उसको इश्क़ हुआ,
आसेब की कोई दवा नहीं !

तूफ़ान से तो बच सकता था,
मैं दरख़्त था झुक सका नहीं !

फ़िर लौट मेरी चिट्ठी आई,
वो घर अब उसका पता नहीं !

'अल्फ़ाज़कई हमराह मिले,
पर इश्क़ दोबारा मिला नहीं !

||| अल्फ़ाज़ |||

बयाँ = Statement, Assertion, वर्णनकहना
क़रार = Agreement, Bond, अनुबंधसमझौता
ता'वीज़ = Amulet, Talisman, जंतर
आसेब = Evil Spirit, Demon, भूत-प्रेतप्रेत-बाधा
दरख़्त = Tree, पेड़वृक्ष
हमराह = Fellow-Traveler, सहयात्री

शनिवार, 22 जून 2019

ग़ज़ल

एक मुश्किल मेरी जैसे हल हो गई,
याद तुझको किया और ग़ज़ल हो गई !

क़ाफ़िया चाहिए हमको हर लफ्ज़ का,
शायरी यूँ हमारा शग़ल हो गई !

फ़र्क़ पड़ता है क्या कैसा दिखता है तू,
अब मोहब्बत मेरी बे-शक्ल हो गई !

तूने तोड़ी क़समफ़िर भी जिंदा हैं हम,
आस बस इक ज़रा सी क़तल हो गई !

तेरे दिल में ठिकाना न मेरा रहा,
मेरे दिल से भी तू बे-दख़ल हो गई !

सब ख़ताएँ तो 'अल्फ़ाज़' की ही नहीं,
जैसी सोहबत थी वैसी अक़ल हो गई !

||| अल्फ़ाज़ |||

क़ाफ़िया = Rhyme, The Last Or Second Last Words Of Each Verse Is Called Qafiya, तुकांत
लफ्ज़ = Word, शब्द
शग़ल (शग़्ल) = Hobby, काम, व्यस्तता
फ़र्क़ = Difference, अन्तर
बे-शक्ल = Faceless, 
आस = Hope, आशा, उम्मीद
क़तल (क़त्ल) = Murder, हत्या
बे-दख़ल = Disinherit, Dislodge, Evict, निष्कासित अधिकारच्युत
ख़ता = Mistake, Fault, दोष
सोहबत = Association, Company, संगत
अक़लअक़्ल = Wisdom, Knowledge, बुद्धिविवेक