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बुधवार, 26 जून 2019

क़रार


जो कहा नहीं, जो सुना नहीं,
जो किसी ग़ज़ल में बयाँ नहीं !

वो जो हममें तुममें क़रार था,
हालात के आगे टिका नहीं !

पिंजरा तो उसने खोल दिया,
उड़ सकता था मैं उड़ा नहीं !

शायद उसको जाना ही था,
आवाज़ दी पर वो रुका नहीं !

शीशा गल के जुड़ सकता है,
दिल टूटा तो फ़िर जुड़ा नहीं !

ता'वीज़ दो उसको इश्क़ हुआ,
आसेब की कोई दवा नहीं !

तूफ़ान से तो बच सकता था,
मैं दरख़्त था झुक सका नहीं !

फ़िर लौट मेरी चिट्ठी आई,
वो घर अब उसका पता नहीं !

'अल्फ़ाज़' कई हमराह मिले,
पर इश्क़ दोबारा मिला नहीं !

||| अल्फ़ाज़ |||

बयाँ = Statement, Assertion, वर्णन, कहना
क़रार = Agreement, Bond, अनुबंध, समझौता
ता'वीज़ = Amulet, Talisman, जंतर
आसेब = Evil Spirit, Demon, भूत-प्रेत, प्रेत-बाधा
दरख़्त = Tree, पेड़, वृक्ष
हमराह = Fellow-Traveler, सहयात्री

गुरुवार, 27 दिसंबर 2018

आसेब

सारे तावीज़ और हर दुआ बे-असर, 
इश्क़ आसेब है, इश्क़ आसेब है !

||| अल्फ़ाज़ |||

तावीज़ = Amulet
बे-असर = Without Effect, Inefficacious
आसेब = Evil Spirit, Demon