जो कहा नहीं, जो
सुना नहीं,
जो किसी ग़ज़ल में बयाँ नहीं !
वो जो हममें तुममें क़रार था,
हालात के आगे टिका नहीं !
पिंजरा तो उसने खोल दिया,
उड़ सकता था मैं उड़ा नहीं !
शायद उसको जाना ही था,
आवाज़ दी पर वो रुका नहीं !
शीशा गल के जुड़ सकता है,
दिल टूटा तो फ़िर जुड़ा नहीं !
ता'वीज़ दो उसको इश्क़ हुआ,
आसेब की कोई दवा नहीं !
तूफ़ान से तो बच सकता था,
मैं दरख़्त था झुक सका नहीं !
फ़िर लौट मेरी चिट्ठी आई,
वो घर अब उसका पता नहीं !
'अल्फ़ाज़' कई हमराह मिले,
पर इश्क़ दोबारा मिला नहीं !
||| अल्फ़ाज़ |||
बयाँ = Statement,
Assertion, वर्णन, कहना
क़रार
= Agreement, Bond, अनुबंध, समझौता
ता'वीज़ = Amulet, Talisman, जंतर
आसेब = Evil Spirit, Demon, भूत-प्रेत, प्रेत-बाधा
दरख़्त
= Tree, पेड़, वृक्ष
हमराह
= Fellow-Traveler, सहयात्री
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