वो आज अपनी कहानी सुनाने आया,
पथरायी आँखों को पानी बनाने आया !
कोई वादा न कोई कसम निभाने आया,
वो जब
भी आया तो छोड़ जाने आया !
एक आस के सहारे हम जिंदा थे अब तलक,
वो आया भी तो क़दमों के निशान मिटाने आया !
रोज़ जलाता हूँ मैं ख़्वाब अँधेरा मिटाने के लिए,
मेरे जलते ख़्वाबों को वो कभी ना बुझाने आया !
फ़िर एक तमन्ना की, फ़िर बेज़ार हो गए,
वो फ़िर से आया तो मुझे छोड़ जाने आया !
शायद उसने आने में बहुत देर लगा दी होगी,
कोई रिश्ता न बचा था जब वो मनाने आया !
फ़राज़.....
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