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सोमवार, 21 अगस्त 2017

ख़ुदा!!

उसे मकानों में न ढूंढ
कि वो मकीं में मिलेगा,
आसमानवाला है वो
लेकिन ज़मीं पे मिलेगा !

क्यूँ तलाशता है ख़ुदा को
तू इबादतगाहों में,
वो बेशक्ल है लेकिन
हर आदमी में मिलेगा !

जाने कैसी ये हमाहमी
ये शोर उसके नाम का,
उसे तन्हाई में पुकार ले
वो ख़ामोशी में मिलेगा !

ख़ुदा ही जाने हक़ीकत
जन्नत-ओ-दोज़ख़ की,
तुझे तेरी करनी का सिला
इसी ज़िन्दगी में मिलेगा !

बहुत नाज़ है तुझे 
अपने इल्म पर ऐ ग़ाफ़िल,
वो बेज़रूरत है फ़राज़
वो बेख़ुदी में मिलेगा !

गर हो सके तो
किसीका ग़मख़्वार हो जा,
इबादत का अस्ल मज़ा
तुझे चाराग़री में मिलेगा !

|||फ़राज़|||

मकीं= Resident, Inhabitant.
इबादतगाह= A place of worship, A mosque, A temple, A church.
बेशक्ल= Faceless, The divine energy, God.
हमाहमी= Hustle-Bustle
जन्नत-ओ-दोज़ख़Heaven and Hell.
सिला= Reward.
नाज़= Pride.
इल्म= Knowledge, Learning.
ग़ाफ़िल= Negligent, Neglectful
बेज़रूरत = Without need.
बेख़ुदी= Intoxication
ग़मख़्वार= Consoler, Sympathizer, Comforter.
इबादत= Worship, Prayer, Adoration.

चाराग़री= Curing, Remedial