अब तो हर मौसम में
ज़रा और फीका पड़ जाता है,
रंग
बालों का,
रंग ख़यालों का
और,
रंग मलालों का !
उस दीवार-घड़ी ने
बदलते
देखे हैं
कैलेण्डर,
न
जाने कितने सालों के !
सोचता
हूँ कि वक़्त न सही,
इस
बार
घड़ी
ही बदल दूँ !
उस खिड़की पर भी
बदले
जा चुके हैं
कई
पुराने परदे,
लेकिन,
तुम्हारे होने का एहसास
बाक़ी
है,
उस तकिये में,
और
मुझमें !
मैं ख़ुद को तसल्ली दूँ,
या
ख़ुद से ही मैं जंग करूँ !
ऐ-रंग-ए-ग़म-ए-यार,
बता
क्या मैं तेरा रंग करूँ !
||| फ़राज़ |||
मौसम= season
ज़रा= A bit
फीका= Insipid, Faded, Languid
ख़यालों=
Thoughts
मलालों=
Regrets.
सालों=
Years.
वक़्त= Time
परदे= Veil
एहसास=
Feeling
तकिया=
Pillow
ख़ुद= Self
तसल्ली=
Solace, Consolation
जंग= Battle, War
रंग-ए-ग़म-ए-यार=
Color of beloved's
sorrow.