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शुक्रवार, 9 अगस्त 2019

दरकार

करिश्मा कोई दिखलाओकोई तो मो'जिज़ा दे दो,
किताबों में जो लिक्खा हैमुझे वैसा ख़ुदा दे दो !

ख़ुदाओं का ये मजमा हैमैं तुझको कैसे पहचानूँ,
वो जो तुम तक पहुँचता होमुझे वो रास्ता दे दो !

मुझे ऊँची मिनारों की कहानी तुम न बतलाओ,
मुझे खुल कर के उड़ना हैमुझे तुम आसमाँ दे दो !

मैं हूँ इन्सान मैं करता रहूँगा ग़ल्तियाँ बेशक,
फ़रिश्ते तुम अगर हो तो मुझे बेशक सज़ा दे दो !

मुझे मालूम है तुम आजकल मसरूफ़ रहते हो,
मदद तो कर न पाओगेकम-अज़-कम मशवरा दे दो !

उसे गर लौटना होगावो ख़ुद ही लौट आएगा,
वो जाना चाहता है तो उसे तुम रास्ता दे दो,

मुझे मुद्दत से गहरी नींद की दरकार होती है,
फ़ना कर दोक़तल कर दोज़हर दे दोदवा दे दो !

नहीं तोहफ़ा कोई मेरे लिए 'अल्फ़ाज़से बेहतर,
अधूरी शायरी हूँ मैंमुझे तुम क़ाफ़िया दे दो !

||| अल्फ़ाज़ |||

करिश्मा = Miracle, Wonder, चमत्कार
मो'जिज़ा = Miracle, Wonder, चमत्कार
मजमा = Gathering, Crowd, भीड़
मिनार = Minaret, Tower,
बेशक = Doubtless, निसंदेह
फ़रिश्ता = An Angel, Messenger Of God, देवदूत
मसरूफ़ = Busy, व्यस्त
कम-अज़-कम = At Least, कम से कम
मशवरा = Advice, Counsel. राय, सलाह
मुद्दत = Length Of Time, Duration, बहुत समय
दरकार = Necessary, Required, Demand, आवश्यकता 
फ़ना = Destruction, नष्टतबाह
क़तल (क़त्ल) = Murder, हत्या




गुरुवार, 31 जनवरी 2019

नज़्म

कुछ काम ज़रूरी याद आए,
शायद मैं उसको भूल गया !

कुछ नई किताबें रखी हैं,
और कुछ को फ़िर से पढ़ना है !
कुछ ग़ज़लें आध-अधूरी हैं,
कुछ नज़्में पूरी करना है !

कुछ अपनों से भी मिलना है
,
कुछ रूठे यार मनाने हैं !
कुछ ग़ैरों से भी मिलना है,
कुछ रिश्ते नए बनाने हैं !

अपनों के क़र्ज़ चुकाने हैं,
अपनों के लिए कमाना है !
कुछ खुद पे ख़र्चा करना है,
कुछ अपने लिए बचाना है !

कुछ ख़त भी अभी जलाने हैं
,
कुछ तेरे नक़्श मिटाने हैं !
जिन वादों को तू भूल गया,
वो हमको अभी भुलाने हैं !

अब अपने मन से जीना है
,
अब अपने मन की करना है !
'अल्फ़ाज़' के रंग से दुनिया को,
और अपने मन को रंगना है !

कुछ काम ज़रूरी याद आए,
शायद मैं उसको भूल गया !

||| अल्फ़ाज़ |||

ज़रूरी = Important, आवश्यक
आध-अधूरी = Incomplete, अपूर्ण
क़र्ज़ = Debt, Loan, ऋण, उधार
नक़्श = Impression, Mark, चिन्ह

शनिवार, 21 अप्रैल 2018

मनमर्ज़ियाँ !!!

ज़िन्दगी को ज़िन्दगी की वजह चाहिए,
जैसे अधूरी ग़ज़ल को क़ाफ़िया चाहिए !

मनमर्ज़ियों को चाहिए आज़ादियाँ सारी,
अब फ़राज़ को फ़राज़ का मर्तबा चाहिए !

इबादत में चाहिए इतनी शिद्दत,
कि रु-ब-रु नमाज़ में ख़ुदा चाहिए !

मन को सुकून चाहिए मस्जिद जैसा,
हक़ीक़त में किताबों सा ख़ुदा चाहिए !

बे-ख़्वाब हो चली हैं आँखें मेरी,
अब तो इस रात की सुबह चाहिए !

बिन बोले जिसे सब समझ जाते थे,
बे-लफ्ज़ वही बचपन की ज़बाँ चाहिए !

झूठी हंसी का बोझ अब उठता नहीं मुझसे,
ज़िन्दगी को फिर कोई कहकहा चाहिए !

कैसे करूँ यक़ीन कि वो बेवफ़ा है फ़राज़’,
जुदाई की कोई झूठी वजह चाहिए !

||| फ़राज़ |||

वजह (Wajah) = Cause, Reason
क़ाफ़िया (Qaafiya) = Rhyme, The Last Or Second Last Words Of Each Verse Is Called Qaafiyaa
मनमर्ज़ियां (Manmarziyan) = Heart’s Desires
आज़ादियाँ (Aazadiyan) = Independencies, Freedom
फ़राज़ (Faraaz) = Height, Elevation, 
फ़राज़ (Faraaz) = Pen Name, 
मर्तबा (Martaba) = Class, Degree, Position
इबादत (Ibadat) = Prayer, Adoration
शिद्दत (Shiddat) = Intensity, Passion, Force
रु-ब-रु (R-Ba-Ru) = Face To Face, In Person, In Front Of.
सुकून (Sukoon) = Peace, Tranquility
हक़ीक़त (Haqiqat) = Reality, 
बे-ख़्वाब (Be-Khwab) = Without A Dream, Dreamless, Sleepless.
बे-लफ्ज़ (Be-Lafz) = Without A Word, Wordless.
ज़बाँ (Zabaan) = Tongue, Speech
कहकहा (Kahkaha) = Loud And Hearty Laugh
यक़ीन (Yaqeen) = Believe, Trust
बेवफ़ा (Bewafa) = Faithless, Treacherous.
जुदाई (Judaai) = Separation