kawayad लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
kawayad लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शनिवार, 28 जुलाई 2018

कवायद !

हर क़दम एक नई दुश्वारी है,
ज़िन्दगी तो फ़िर भी जारी है !

मत सोच नतीजा क्या होगा,
वो कर जो तेरी ज़िम्मेदारी है !

इंसान के इंसान बनने की,
क़वाइद अब भी जारी है !

इसका हिसाब चुकाना होगा,
ये ज़िन्दगी एक उधारी है !

बहुत कमाई है ज़िन्दगी तूने,
बता मौत की क्या तैयारी है?

फ़िर से हैं चुनावी तक़रीरें,
फ़िर भूख मज़हब से हारी है !

जहाँ हम कहें वहां करो सजदा,
हो रहा ये ऐलान सरकारी है !

जो दिल में वो ज़बां पर है,
आदत कुछ ऐसी हमारी है !

कुछ तमाशा तो तू भी कर,
'फ़राज़' ये दौर ही इश्तिहारी है !

||| फ़राज़ |||

क़दम= Step
दुश्वारी= Difficulty
जारी= Proceeding, Continue
नतीजा= Result, Outcome
ज़िम्मेदारी= Responsibility
क़वाइद = Exercise, Drill
चुनावी= Electoral
तक़रीरें= Speeches, Recitals, Orations
मज़हब= Religion
सजदा= Bowing In Prayer So As To Touch The Ground With The Forehead
ऐलान= Announcement, Proclamation, Notification
सरकारी= Governmental, Official
ज़बां= Tongue, Speech
दौर= Time, World
इश्तिहारी= Related To Publicity