एक उम्र से भटकता हूँ
मैं ख़ानाबदोशियों में,
एक ज़माने से मैं
बेघर सा रहता हूँ !
मैं ख़ानाबदोशियों में,
एक ज़माने से मैं
बेघर सा रहता हूँ !
कभी दिल दुख जाये
तो ख़ुद ही बहला लेता हूँ !
अब फ़िक्रें सोने नहीं देतीं
सुबह जल्दी उठ जाता हूँ !
अब फ़िक्रें सोने नहीं देतीं
सुबह जल्दी उठ जाता हूँ !
ख़ुद ही संवार लेता हूँ
माथे से फ़िक्रों की सिलवटें,
कपड़ों को अब ख़ुद ही
खूँटी पर टांग देता हूँ !
अहमियत अपने पैसों की,
कीमत रिश्तों की भी जानता हूँ !
मिल्लतदारियों, दुनियादारियों का
हिसाब अब मैं ख़ुद ही रखता हूँ !
आईने में अक्सर देखता हूँ
मेरे चेहरे सा एक चेहरा,
मेरे चेहरे सा एक चेहरा,
आइना बताता है अब
बदला-बदला सा दिखता हूँ !
बदला-बदला सा दिखता हूँ !
चादर ख़ुद ही ओढ़ लेता हूँ
अब मैं सोने से पहले !
बारिशों में भी अब अक्सर
मैं कम ही भीगता हूँ !
एक एक्स्ट्रा चम्मच खाना
ख़ुद ही निकाल लेता हूँ !
दिल न भी चाहे तो भी
मन मार के खा लेता हूँ !
अपनी भी ज़िम्मेदारियां
कम नहीं होती हैं 'फ़राज़',
अपने घर से बहुत दूर
मैं बरसों से रहता हूँ !
||| फ़राज़ |||
||| फ़राज़ |||