Shauq लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
Shauq लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शनिवार, 20 जुलाई 2019

तुम !


यूँही नहीं आती मेरे होंठों पे तबस्सुम,
चेहरा जो खिला है मेरा इसकी वजह हो तुम !

मेरे हज़ार
 शौक़ है जिनकी हो तुम तलब,
मुझको हज़ार मर्ज़ हैं जिनकी दवा हो तुम !

छू कर के जब भी गुजरीं, आराम आ गया,
सहराओं की तपिश में ठंडी हवा हो तुम !

एक दूसरे के हक़ में करते हैं हम दुआ,
मैं हूँ दुआ तुम्हारीमेरी दुआ हो तुम !

बर्बादियों का मेरी मुझको गिला नहीं,
मेरे सभी ख़सारों का इक नफ़ा हो तुम !

आए हो देर से पर आए हो तुम दुरुस्त,
माँगा था इक सितारा और कहकशाँ हो तुम !

रिश्ता ये दो दिलों का है कितना मुबारक,
मैं हूँ रज़ा तुम्हारी और मेरी रज़ा हो तुम !

अब हमको ज़िन्दगी से कोई गिला नहीं,
'अल्फ़ाज़के सबर का बेहतर सिला हो तुम !

||| अल्फ़ाज़ |||

तबस्सुम = Smile, मुस्कुराहट, मुस्कान
वजह = Cause, Reason, कारण
शौक़ = Fondness, Desire, रूचि
तलब = Demand, Desire, याचना, चाह
मर्ज़ = Sickness, Disease, रोग
सहरा = Desert, Wilderness रेगिस्तान,
तपिश = Heat, गर्मी, ताप
हक़ = Favor, पक्ष
गिला = Complaint
ख़सारा = Loss, हानि
नफ़ा = Profit, लाभ
दुरुस्त = Proper, Correct, शुद्ध, उचित, मौजू
कहकशाँ = The Milky Way, Galaxy
मुबारक = Auspicious, शुभान्वितकल्याणकारी,
रज़ा = Desire, Will, Wish, इच्छा, अभिलाषा, चाहत 
सबर = Patience, धैर्य
सिला = Reward, पुरुस्कार, प्रतिफल

शुक्रवार, 15 दिसंबर 2017

आमाल !!!

बहुत इज़्ज़त से लोग घर बुलाते हैं,
कभी ग़रीब की बस्ती से गुज़र के देखिये !
वो मुख़्तसर असबाब में मुतमईन रहते हैं,
आप भी कभी थोड़े में सब्र करके देखिये !

लिबास-ओ-कलाम की इता'अत न कीजिये,
है ज़रूरी कि आमाल भी रहबर के देखिये !
मुआशरे की कुछ जिम्मेदारियां आप पर भी हैं,
अपनी ऊंची कुर्सी से कभी उतर के देखिये !

हसरतें दिल में दो जहाँ की तो रखिये,
दायरे भी ज़मीर की चादर के देखिये !
हर ख़्वाब को ताबीर मिल जायगी 'फ़राज़',
अपने शौक़ को अपना हुनर कर के देखिये !

|||फ़राज़|||

मुख़्तसर= Brief, concise, short.
असबाब= Belongings, Wordly goods.
मुतमईन= Satisfied, Tranquil.
लिबास= Apparel, Dress.
कलाम= Words, Speech, Talk.
इता'अत= Obedience, Submission, Follow.
आमाल= Deeds, Conduct, Behaviour, Act.
रहबर= Guide, Conductor.
मुआशरा= Society.
हसरत= Desire
जहाँ= The world, Universe, Earth.
दायरा= Purview, Circumference, Limit.
ज़मीर= Mind, Heart, Concience. 
ताबीर= Interpretetion of dream.
शौक़= Fondness, Ardour.
हुनर= Art, Skill, Knowledge.