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शनिवार, 20 जुलाई 2019

तुम !


यूँही नहीं आती मेरे होंठों पे तबस्सुम,
चेहरा जो खिला है मेरा इसकी वजह हो तुम !

मेरे हज़ार
 शौक़ है जिनकी हो तुम तलब,
मुझको हज़ार मर्ज़ हैं जिनकी दवा हो तुम !

छू कर के जब भी गुजरीं, आराम आ गया,
सहराओं की तपिश में ठंडी हवा हो तुम !

एक दूसरे के हक़ में करते हैं हम दुआ,
मैं हूँ दुआ तुम्हारीमेरी दुआ हो तुम !

बर्बादियों का मेरी मुझको गिला नहीं,
मेरे सभी ख़सारों का इक नफ़ा हो तुम !

आए हो देर से पर आए हो तुम दुरुस्त,
माँगा था इक सितारा और कहकशाँ हो तुम !

रिश्ता ये दो दिलों का है कितना मुबारक,
मैं हूँ रज़ा तुम्हारी और मेरी रज़ा हो तुम !

अब हमको ज़िन्दगी से कोई गिला नहीं,
'अल्फ़ाज़के सबर का बेहतर सिला हो तुम !

||| अल्फ़ाज़ |||

तबस्सुम = Smile, मुस्कुराहट, मुस्कान
वजह = Cause, Reason, कारण
शौक़ = Fondness, Desire, रूचि
तलब = Demand, Desire, याचना, चाह
मर्ज़ = Sickness, Disease, रोग
सहरा = Desert, Wilderness रेगिस्तान,
तपिश = Heat, गर्मी, ताप
हक़ = Favor, पक्ष
गिला = Complaint
ख़सारा = Loss, हानि
नफ़ा = Profit, लाभ
दुरुस्त = Proper, Correct, शुद्ध, उचित, मौजू
कहकशाँ = The Milky Way, Galaxy
मुबारक = Auspicious, शुभान्वितकल्याणकारी,
रज़ा = Desire, Will, Wish, इच्छा, अभिलाषा, चाहत 
सबर = Patience, धैर्य
सिला = Reward, पुरुस्कार, प्रतिफल

सोमवार, 30 अप्रैल 2018

!!! दिल-ए-मुन्तज़िर !!!

मुझे बे-वजह सी लगती है ये बारिश की रातें,
हक़ीक़त न सहीख़याल  बनके चले आओ !

क्या कमी है दिल को, दिल समझ नहीं पाता,
जवाब न सही, तुम सवाल बनके चले आओ !

ये तन्हाईयाँ जिस्म में काँटों की तरह चुभती हैं,
मरहम न सहीशामिल-ए-हाल बनके चले आओ !

कब तलक जलता रहूँ मुसलसल मैं तपिश में,
उरूज न सही, मेरा ज़वाल बनके चले आओ !

दर्द की तासीर भी तो अब कम हो चली है,
सुकून न सही,तुम मलाल बनके चले आओ !

दिल-ए-मुन्तज़िर को 'फ़राज़' आराम तो आये,
वस्ल मुम्किन नहीं, तो इंतिक़ाल बनके चले आओ !

||| फ़राज़ |||

बे-वजह= Without Cause/Reason
हक़ीक़त= Reality
ख़याल= Thought, Imagination
तन्हाईयाँ= Loneliness
मरहम= Ointment
शामिल-ए-हाल= Associated With Present Circumstances.
मुसलसल= Continuous, 
तपिश= Heat, Scorch, Agitation.
उरूज= Rising, Exaltation, Ascension
ज़वाल= Decline
तासीर= Effect, Influence
सुकून= Peace, Tranquility
मलाल= Regret, Sorrow, Grief.
दिल-ए-मुन्तज़िर = The Expectant Heart
वस्ल = Union Or Meeting (Typically Used In The Context Of A Meeting Of Lovers)
मुम्किन = Possible
इंतिक़ाल= Death, Migration,