ज़िन्दगी
की ईमारत की बुनियाद की तरह,
बेहतर
कोई तोहफ़ा नहीं, उस्ताद की तरह !
||| फ़राज़ |||
ईमारत
= Building
बुनियाद=
Foundation, Base
तोहफ़ा
= Gift
उस्ताद
= Teacher, Mentor
जिंदगी दो तरह के सवालों में है एक जीते हैं हम, एक ख़यालों में है! चलिए रूबरू कराते हैं अल्फ़ाज़ की अल्फ़ाज़ियत से l मैं वादा करता हूँ कि मेरी हर ग़ज़ल में आप मुझसे, और ख़ुद से भी मिलेंगे l
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