गुरुवार, 6 सितंबर 2018

नसीहत


मुद्दई भी हमीं, मुल्ज़िम भी हमीं,
ये रस्म-ए-अदातल ठीक नहीं !

मुंसिफ़ भी वही, मुजरिम भी वही,
इंसाफ़ की चाहत ठीक नहीं !

हर ख़ता नहीं उस निगाह की,
अपनी भी तो नीयत ठीक नहीं !

बेईमान ये दिल हो जाता है,
जलवों की ये रिश्वत ठीक नहीं !

एक मोड़ पे मुड़ जायेगा वो,
राही से मोहब्बत ठीक नहीं !

ठोकर के सिवा क्या पायेगा,
पत्थर की इबादत ठीक नहीं !

दो तरह की बातें करती है,
मरकज़ की हुकूमत ठीक नहीं !

आक़िल है तो तू ख़ामोश ही रह,
जाहिल से जहालत ठीक नहीं !

सच नीम सा कड़वा होता है,
बिन माँगे नसीहत ठीक नहीं !

हर राज़ बयाँ कर देता है,
'फ़राज़' की आदत ठीक नहीं !

||| फ़राज़ ||| 

मुद्दई = Petitioner, Appellant
मुल्ज़िम = Accused
रस्म-ए-अदातल = Custom/ Ritual Of The Court
मुंसिफ़ = Judge
मुजरिम = Guilt, Criminal, Sinner, Convict
इंसाफ़ = Justice
ख़ता = Fault, Mistake, Sin
निगाह = Look, Glance
नीयत = Intention
बेईमान = Cheat, Sinner
जलवा = Luster, Splendor, Display, Show
रिश्वत = Bribe
राही = Traveler
सिवा = Except, But, Over And Above
इबादत = Worship
मरकज़ = Center, Central
हुकूमत = Government
आक़िल = Wise, Intelligent
ख़ामोश = Silent, Quite
जाहिल = Illiterate
जहालत = Illiteracy, Ignorance, Boorishness
नसीहत = Advice
राज़ = Secret
बयाँ = Divulge, Statement
आदत = Habit

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