मुद्दई भी हमीं, मुल्ज़िम भी हमीं,
ये रस्म-ए-अदातल ठीक नहीं !
मुंसिफ़ भी वही, मुजरिम भी वही,
इंसाफ़ की चाहत ठीक नहीं !
हर ख़ता नहीं उस निगाह की,
अपनी भी तो नीयत ठीक नहीं !
बेईमान ये दिल हो जाता है,
जलवों की ये रिश्वत ठीक नहीं !
एक मोड़ पे मुड़ जायेगा वो,
राही से मोहब्बत ठीक नहीं !
ठोकर के सिवा क्या पायेगा,
पत्थर की इबादत ठीक नहीं !
दो तरह की बातें करती है,
मरकज़ की हुकूमत ठीक नहीं !
आक़िल है तो तू ख़ामोश ही रह,
जाहिल से जहालत ठीक नहीं !
सच नीम सा कड़वा होता है,
बिन माँगे नसीहत ठीक नहीं !
हर राज़ बयाँ कर देता है,
'फ़राज़' की आदत ठीक नहीं !
||| फ़राज़ |||
मुद्दई =
Petitioner, Appellant
मुल्ज़िम =
Accused
रस्म-ए-अदातल = Custom/ Ritual Of The Court
मुंसिफ़ =
Judge
मुजरिम =
Guilt, Criminal, Sinner, Convict
इंसाफ़ =
Justice
ख़ता =
Fault, Mistake, Sin
निगाह =
Look, Glance
नीयत =
Intention
बेईमान =
Cheat, Sinner
जलवा = Luster, Splendor, Display, Show
रिश्वत =
Bribe
राही =
Traveler
सिवा = Except, But, Over And Above
इबादत =
Worship
मरकज़ =
Center, Central
हुकूमत =
Government
आक़िल =
Wise, Intelligent
ख़ामोश =
Silent, Quite
जाहिल =
Illiterate
जहालत = Illiteracy, Ignorance, Boorishness
नसीहत =
Advice
राज़ =
Secret
बयाँ =
Divulge, Statement
आदत =
Habit
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