कभी
भागती
कभी
थमी-थमी सी लगती है !
ज़िन्दगी
आजकल
अजनबी
सी लगती है !
दिल
ने आज
तेरी
उम्मीद छोड़ दी शायद !
सांस
भी ज़रा
थमी-थमी
सी लगती है !
तेरे
ख़याल आज
धुंधले-
धुंधले से लगते हैं !
तेरी
तस्वीर आज
लाज़मी सी लगती
है !
वक़्त
शायद
बहुत
तेज़ गुज़रा होगा !
घड़ियाँ
दीवार पर
थकी-थकी
सी लगती है !
तूने
जाते हुए
आज
न मुड़कर देखा !
ये
मुलाक़ात शायद
आख़िरी
सी लगती है !
देर
कर दी
तूने
आने में ‘फ़राज़’,
अपनी
सी वो निगाह
अब
अजनबी सी लगती है !
||| फ़राज़ |||
लाज़मी
= compulsory, essential