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मंगलवार, 23 मई 2017

ज़िन्दगी !!!

कभी भागती
कभी थमी-थमी सी लगती है !
ज़िन्दगी आजकल
अजनबी सी लगती है !

दिल ने आज
तेरी उम्मीद छोड़ दी शायद !
सांस भी ज़रा
थमी-थमी सी लगती है !

तेरे ख़याल आज
धुंधले- धुंधले से लगते हैं !
तेरी तस्वीर आज
लाज़मी सी लगती है !

वक़्त शायद
बहुत तेज़ गुज़रा होगा !
घड़ियाँ दीवार पर
थकी-थकी सी लगती है !

तूने जाते हुए
आज न मुड़कर देखा !
ये मुलाक़ात शायद
आख़िरी सी लगती है !

देर कर दी
तूने आने में फ़राज़’,
अपनी सी वो निगाह
अब अजनबी सी लगती है !

||| फ़राज़ |||


लाज़मी = compulsory, essential