bulandi लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
bulandi लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

मंगलवार, 10 अप्रैल 2018

!!! नाम-ए-फ़राज़ !!!

कोई न जोड़ पाया है कभी टूटे हुए दिल को,
तेरी शीशागरी पे तुझको इतना नाज़ बेजा है !

कि उसके नाज़ नख़रों के सवाली और भी होंगे,
मनाने वो न आयेगा, कि तू नाराज़ बेजा है !

तुझे तो जीतना है आसमान की हर बुलंदी को,
अगर मंज़िल ज़मीं है तो तेरी परवाज़ बेजा है !

नहीं थमते तेरे मन के ये कारोबार दुनिया के,
महज़ कसरत ज़बानी हो तो वो नमाज़ बेजा है !

तजरबे हैं बुरे लेकिन सबक़ अच्छा मैं देता हूँ,
तेरी इस्लाह न कर पायें तो मेरे अल्फ़ाज़ बेजा हैं !

तेरे मेरे कलम में तो स्याही एक जैसी है,
अगर बेहतर न मैं लिखूं तो नाम-ए-फ़राज़ बेजा है !

||| फ़राज़ |||


शीशागरी= Art of glass-making.
नाज़= Pride, Proud.
बेजा= Fruitless, Unbecoming, Unfair, Unbefitting.
नख़रा= Coquetry
सवाली= A beggar, A petitioner
नाराज़= Displeased, Offended.
बुलंदी= High place, Height, Loftiness
मंज़िल= Destination
परवाज़= Flight
कारोबार= Business, Trade, affair
महज़= Merely, Only
कसरत= Exercise
ज़बानी= Oral, Verbal
तजरबे= Experiences,
सबक़= Lesson
इस्लाह= Correction, Reform
अल्फ़ाज़= Words
स्याही= Ink
बेहतर= Better

नाम-ए-फ़राज़= Name of Faraaz (In respect of the great Urdu poet Ahmed Faraz Sir)