मैं
जब से बे-वजह सा हो गया हूँ,
निहायत
ख़ुशनुमा सा
हो गया हूँ !
मुझे
सब मांगने लगे हैं,
मैं
जब से दुआ सा हो गया हूँ !
ख़िज़ाँ की धूप में झुलस कर,
शजर एक सायबाँ सा हो
गया हूँ !
सभी
को मुआफ़ जब से किया है,
मैं बाद-ए-सबा सा हो गया हूँ !
नहीं
सुनता मैं अपने ज़हन की,
ज़रा
सा मनचला सा हो गया हूँ !
न
अपनी छत न अपनी ज़मीं है,
शहर
में एक मकाँ सा हो गया हूँ !
पुरानी
बेड़ियों को
तोड़ कर के,
‘फ़राज़’
मैं फ़िर नया सा गया हूँ !
||| फ़राज़ |||
बे-वजह=
Causeless, Without-Cause
निहायत= Very Much, Extreme
ख़ुशनुमा= Pleasant To
Sight
ख़िज़ाँ= Autumn,
Decay
शजर= Tree
सायबाँ= Shade,
Shelter
मुआफ़=
Excuse, Absolve, Exempt
बाद-ए-सबा= Morning
Breeze, The Zephyr, A Refreshing Wind
ज़हन= Mind
मकाँ=
House, Home
बेड़ियाँ= Chains