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रविवार, 19 फ़रवरी 2017

रिवायतें

मन की मुंडेरों पर लगे
कांच के टूटे टुकड़े जैसी
रस्में और रिवायतें
रोकती हैं सरहदें लांघने से !
जो चुभता है
उसे निकाल देना चाहिए !

हादसों से तजरबा लेते हैं,
हुनर बेचने वाले
हस्ती नहीं बेचा करते !!!

| फ़राज़ |

शनिवार, 18 फ़रवरी 2017

एक शोर

मन के हर कोने में
मन ढूंढता है अपना कोना
मिलता है लेकिन
एक शोर, एक हुजूम
सबको तलाश है सुकून की
फिर भी तलाशते हैं
शोर में !

||| फ़राज़ |||


हुजूम= Mob, Crowd, Throng.