मन की मुंडेरों पर लगे
कांच के टूटे टुकड़े जैसी
रस्में और रिवायतें
रोकती हैं सरहदें लांघने से !
जो चुभता है
उसे निकाल देना चाहिए !
हादसों से तजरबा लेते हैं,
हुनर बेचने वाले
हस्ती नहीं बेचा करते !!!
| फ़राज़ |
| फ़राज़ |
जिंदगी दो तरह के सवालों में है एक जीते हैं हम, एक ख़यालों में है! चलिए रूबरू कराते हैं अल्फ़ाज़ की अल्फ़ाज़ियत से l मैं वादा करता हूँ कि मेरी हर ग़ज़ल में आप मुझसे, और ख़ुद से भी मिलेंगे l