rahat लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
rahat लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शनिवार, 6 अक्टूबर 2018

इंतिहा

जो दुआ थी वही बद्-दुआ हो गई,
ये मेरी ज़िन्दगी क्या से क्या हो गई !

इस तरह से गए छोड़कर वो हमें,
रूह जैसे बदन से जुदा हो गई !

आशिक़ों की
 मिसालें था देता जहाँ,
आशिक़ी मैंने की तो ख़ता हो गई !

तेरी यादों में हमको ख़बर न हुई,
रात कब ढल गई, कब सुबह हो गई !

साथ अपने वो सब राहतें ले गया,
इन लबों से हँसी लापता हो गई !

हमने सोचा था, देखेंगे बस एक नज़र,
एक नज़र क्या मिलीसिलसिला हो गई !

अब तो उम्मीद भी थक के कहने लगी,
छोड़ 'अल्फ़ाज़' अब इंतिहा हो गई !

||| अल्फ़ाज़ |||

बद्-दुआ= Curse
रूह= Soul
बदन= Body
मिसाल= Example, Instance, Model
ख़ता= Mistake/ Fault
ख़बर= Information
राहत= Rest, Comfort, Ease
लब= Lips
लापता= Lost
सिलसिला= Chain, Series, Succession
उम्मीद= Hope
इंतिहा= Utmost Limit, End, Extremity