parwaz लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
parwaz लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

मंगलवार, 21 नवंबर 2017

तजुर्बा !!!

क़दम ज़मीन पर ही रखता हूँ हमेशा,
निगाह में है सारा आसमां रखा !
याद अपनी हस्ती को भी रखना था,
एक कुरता अलमारी में फटा सा रखा !

निगाह में मेरी बुलंद आसमां है,
परवाज़ को मैंने बाज़ के जैसा रखा !
सोने से कुंदन बनने की ज़िद में,
एक जूनून दिल में दहकता रखा !

दास्ताँ ज़रा तवील लिखनी थी मुझे,
कलम रातों में अक्सर जागता रखा !
यूँ तो मैं ख़ामोश तबियत हूँ लेकिन,
कलम में हुनर है चीख़ता रखा !

मुझे सीखना था हुनर बदल जाने का,
वक़्त को था मैंने रहनुमा रखा !
संभालना भी मैं सीख ही गया 'फ़राज़',
अपनी ठोकरों से था मैने तजुर्बा रखा !!!

|||फ़राज़|||


आसमां= Sky
हस्ती= Existence, Life.
बुलंद= Raised, High, Great.
परवाज़= Flight
कुंदन= Pure Gold, Fine.
दहकता= Aflame.
दास्ताँ= Story, Tale.
तवील= Long, Lengthy.
ख़ामोश तबियत= Introvert
हुनर= Talent, Skill.
रहनुमा= Guide, 
तजुर्बा= Experience.






सोमवार, 28 अगस्त 2017

ग़ज़ल-ए-फ़राज़!!!

मुब्तिला क्यूँ रहता हैं मन मुनाफ़ाखोरी में,
ख़ुदग़र्ज़ियाँ छुपी रहती हैं मन की दराज़ में !

मुद्दतों तलक ख़लाओं में भटकता रहा हूँ,
ख़ुद को पाया है मैंने अपने ही अल्फ़ाज़ में !

ज़ुल्म देखकर भी खिड़कियाँ बंद कर लेते हैं,
रवादारी नहीं बाक़ी इस शहर के मिजाज़ में !

एक ही माटी के पुतले तो सभी इंसान हैं,
थोड़े सच्चे, थोड़े झूठे, अपने ही अंदाज़ में !

वो बेख़बर शोर कहता है सदा-ए-रूहानी को,
क्या ख़ुदा बसता नहीं मौसिक़ी-ओ-साज़ में !

तू परिंदा है ग़ाफ़िल, शाम को लौटना होगा,
मत भूल ज़मीं तू अपनी ऊंची परवाज़ में !

बहुत ख़ुशनसीब हूँ कि हुनरमंद हूँ मैं,
दोस्त मिलते हैं मुझे हर दिलनवाज़ में !

तुझको भी ज़िन्दगी से कुछ तो गिला है,
ख़ुद को ढूंढता है तू ग़ज़ल-ए-फ़राज़ में !

|||फ़राज़|||

मुब्तिला= Afflicted.
मुनाफ़ाखोरी=Profiteer
ख़ुदग़र्ज़ी= selfishness.
दराज़= Drawer
ख़ला=Space, Hollow.
रवादारी=Leniency
मिजाज़=Nature
सदा-ए-रूहानी= Spiritual/God's Call
मौसिक़ी-ओ-साज़=Music and Instrument.
ग़ाफ़िल= Neglectful
परवाज़= Flight.
दिलनवाज़= Kind, Benevolent.

सोमवार, 24 जुलाई 2017

जूनून !!!

तेरा हर ख़्वाब हो जायेगा हक़ीकत
जूनून पर अपने तू यकीन कर ले !

अपनी ज़िद के पंख फैलाकर तो देख
परवाज़ से आसमान को ज़मीं कर ले !

बनके सूरज तू सारा जहाँ मुनव्वर कर
बनके चाँद अमावास को चांदनी कर दे !

उससे हारेगा तो सब जीत जायेगा तू
किसी रूठे यार से फ़िर दोस्ती कर ले !

माँ कहती हैं कि ख़ुदा सुनता है दुआओं को
माँ की भी सुन ले, ख़ुदा की भी बंदगी कर ले !

तुझसा भी कोई हिस्सास तो होगा ज़माने में 
कोई हमख़याल मिल जाये तो हमनशीं कर ले !

ज़माने की हमा-हामी ख़त्म न होगी ता-क़यामत
जहाँ दिल लग जाए तेरा, क़याम वहीँ कर ले !

तेरा नाम भी लिख जायेगा तारीख़ों में ''फ़राज़
अपनी सोहबत से तू आदमी को आदमी कर दे !

||| फ़राज़ |||

परवाज़= Flight, Rising. 
मुनव्वर= Illuminated, Enlightened,
बंदगी= Worship, Devotion
हिस्सास= Sensitive. 
हमनशीं= Companion, Associate.
हमा-हामी= Bragging, Boasting, Tall talk.
ता-क़यामत= Up to dooms day.
क़याम= Stay.
तारीख़= Date, History.