पानी में अक्स देखते हैं, लहरों को ख़ता देते हैं,
ग़ैरों की ग़ल्तियों की अपनों को सज़ा देते हैं !
इंसान को इंसान तो समझते नहीं लेकिन,
पत्थर को भी ख़ुदा तो यही लोग बना देते हैं !
मिलते थे बे-सबब ही जो, मसरूफ़ हैं इतने,
मिलते हैं तो मिलने का भी एहसान जता देते हैं !
तू ग़म न कर कि तुझपे ये हालात आ गए,
जीने का सलीक़ा भी तो हालात सिखा देते हैं !
ये लोग तमाशाई हैं, इनकी न सुनो तुम,
आग लगा कर के यही लोग मज़ा लेते हैं !
आप भी बे-सबब ही किसी का दर्द बांटिये,
इंसान तो आज भी दिल से दुआ देते हैं !
शम्मा को तो जलना है, पतंगे से उसे क्या,
अपनी ही ज़िद में पतंगे ख़ुद को जला लेते हैं !
इन सबके भी दिल में तो आरज़ू-ए-यार है,
क्यूँ इश्क़ करने की यही लोग सज़ा देते हैं?
'फ़राज़' भला उन लोगों का अक़ीदा क्या होगा,
जो ज़हर सस्ता और महँगी दवा देते हैं !
||| फ़राज़ |||
||| फ़राज़ |||
अक्स= Reflection, Reverse, Image.
ख़ता= Mistake, Fault.
ग़ैर= Stranger
ग़ल्ती= Fault, Error, Mistake
सज़ा= Punishment
बे-सबब= Without Cause Or Reason
मसरूफ़= Busy
एहसान= Favor
ग़म= Sorrow, Grief.
हालात= Circumstances.
सलीक़ा= Good Manners, Discreet Of Good Disposition
तमाशाई= Bystander, Onlooker,
शम्मा= Candle
ज़िद= Obstinacy, Pigheadedness
पतंगे= Moth
आरज़ू-ए-यार= Desire, Wish, Longing Of Beloved/Lover
अक़ीदा= Fundamental Doctrine Of Belief, Tenet
अक़ीदा= Fundamental Doctrine Of Belief, Tenet